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डिफाल्टर ग्रेड सरकारी स्कूल के महान शिक्षक

ठाकुर अनिरूध्द सिंह शासकीय प्राथमिक शाला कुशालपुर रायपुर के अधिकतर बच्चों को गिनती नहीं आता एवं अक्षर ज्ञान भी सही ढंग से नहीं आता जिसके कारंण मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता योजना के तहत जांच में इस स्कूल को डिफाल्टर का डी ग्रेड मिला है। इस स्कूल में पर्याप्त 8 शिक्षक रहने के बाद भी इस स्कूल को ABC के बाद D ग्रेड मिला है। इस स्कूल के शिक्षक स्कूल पढ़‌ाने जाते हैं या गप्प मारने जाते हैं इसका विशेष जांच होना चाहिये एवं पढ़ाई में लापर‌वाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्यवाही होना आवश्यक है। इस स्कूल के महान शिक्षकों का नाम अन्नपूर्णा महानंद, ज्योति बंजारे, पुजा मतलम, गरिमा, शाकार, राखी शर्मा, पूरनदास बंजारे, डाक्टर प्रसाद साहू एवं अशोक वर्मा है। रायपुर जिला में लगभग एक हजार स्कूल है जिसमें से 259 स्कूल को डिफाल्टर का डी ग्रेड मिला है।

चार कारखाने को बंद करने का आदेश दिया पर्यावरण अधिकारियों ने

कलेक्टर ने लिया सख्त कदम दुर्ग जिले में पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने वाले औद्योगिक संस्थानों पर कलेक्टर अभिजित सिंह के निर्देश में सख्त कार्रवाई की गई है। कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं और प्रदूषण पाए जाने पर संबंधित इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया गया। प्रभावित क्षेत्र और इकाइयां भिलाई-03 तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम अकलौरडीह-जरवाय, ग्राम जरवाय और कुम्हारी क्षेत्र की चार प्रमुख इकाइयों पर कार्रवाई की गई। • ग्राम अकलौरडीह-जरवाय में मेसर्स आर.डी. एजेंसी (वेस्ट मटेरियल स्क्रीनिंग यूनिट) को भारी धूल और बिना अनुमति संचालन के कारण बंद किया गया। • ग्राम जरवाय में मेसर्स पंकज अग्रवाल (स्लैग क्रशिंग यूनिट) और मेसर्स टेथिस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को नियम उल्लंघन के कारण बंद किया गया। • कुम्हारी क्षेत्र अहिवारा रोड स्थित मेसर्स वैद्य फूड प्रोडक्ट्स को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण न होने के कारण बंद करने के आदेश दिए गए। कानूनी प्रावधान और कार्रवाई...

अवैध फ्लाईऐश गाड़ी को पर्यावरण विभाग ने लेन-देन करके छोड़ दिया

जिले में अवैध फ्लाईऐश का मामला लगातार सामने आ रहा है। इस बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जो चौंकाने वाला है। लैलूंगा पुलिस ने जिस फ्लाईऐश के 9 वाहनों को अवैध डंपिंग करने के मामले में पकड़ा था। वहीं जब आगे की कार्रवाई के लिए मामला पर्यावरण विभाग के सुपुर्द किया तो विभाग ने यह कहते हुए मामले को क्लीन चिट दिया कि संबंधितों को पास फ्लाईऐश डंप करने की अनुमति दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि उनके पास अनुमति थी तो वे पुलिस को क्यों नहीं दिखाए। वहीं दो दिन बाद इसकी अनुमति कहां से आ गई। उल्लेखनीय है कि बीते 24 दिसंबर को लैलूंगा पुलिस ने ग्राम सोहनपुर में अवैध रूप से फ्लाई ऐश डंप किए जाने के मामला उजागर किया था। पुलिस ने मौके से 7 हाइवा और 2 ट्रेलर वाहन जब्त किए। पुलिस को सूचना मिली कि फ्लाईऐश बिना किसी वैधानिक अनुमति के ट्रेलर वाहनों के माध्यम से ग्राम सोहनपुर क्षेत्र में खुलेआम डंप किया जा रहा है। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस तो वाहन फ्लाईऐश अनलोड करते पाए गए। चालकों से पूछताछ की गई, लेकिन वे फ्लाई ऐश परिवहन और डंपिंग से संबंधित कोई वैध अनुमति अथवा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

मनमानी करने वाले पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही होना आवश्यक है

दो महिला ईई को नोटिस, एक ने एग्रीमेंट पुनर्जीवित किया, दूसरी नदारद रहती हैं लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता बिलासपुर ने संभाग की दो महिला कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन अधिकारियों पर कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, वित्तीय अनियमितताओं और अनाधिकृत रूप से मुख्यालय से गायब रहने के गंभीर आरोप हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभाग द्वारा इनके विरुद्ध शासन को अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है। चांपा की ईई पर समाप्त हो चुके अनुबंध को पुनर्जीवित करने का आरोप: चांपा की कार्यपालन अभियंता ममता पटेल को जारी नोटिस में एक पुराने अनुबंध को नियमों के विरुद्ध पुनर्जीवित करने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। वर्ष 2017-18 के एक कार्य का अनुबंध 16 अक्टूबर 2023 को धारा-14 के तहत समाप्त कर दिया गया था। अनुबंध समाप्त होने के लगभग 2 वर्ष 27 दिन बाद इसे दोबारा जीवित कर दिया गया। एसई ने इसे घोर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन माना है। पूछा है कि आखिर किस आधार पर इस पुराने कार्य को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव भेजा गया? सात दिनों में जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई ह...

हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी सेक्रेटरी को ₹1000 का जुर्माना किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने PWD सेक्रेटरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि, देखा जा रहा है कि राज्य सरकार के अफसर हाईकोर्ट के आदेशों को बहुत हल्के में ले रहे हैं। इस तरह से प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही और टालमटोल रवैए पर सख्त रुख अपनाना जरूरी है। दरअसल, डिवीजन बेंच ने प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों पर PWD सेक्रेटरी से शपथपत्र मांगा था। जवाब देने में देरी की वजह से कोर्ट ने जुर्माने की कार्रवाई की है। दरअसल, हाईकोर्ट में राज्य की बदहाल सड़कों को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस दौरान हाईकोर्ट ने बिलासपुर के पेंड्रीडीह बायपास से नेहरू चौक तक की सड़क को लेकर भी सुनवाई की। पिछली सुनवाई के दौरान 23 सितंबर को हाईकोर्ट ने मरम्मत और नई सड़क निर्माण पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही कहा था कि एनआईटी रायपुर की रिपोर्ट जल्द ली जाए, ताकि नई सड़क का काम तेजी से शुरू किया जा सके। राज्य शासन ने दिया था जवाब सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी के सचिव की ओर से बताया गया था कि, पेंड्रीडीह से नेहरू चौक...

दवाई दुकानों में फार्मासिस्ट नहीं बैठाने पर 3 महीने की सजा

छत्तीसगढ़ के लगभग एक तिहाई दवा दुकानों में भी फार्मासिस्ट नहीं बैठते ड्रग इंस्पेक्टरो के संरक्षण में छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर अब सरकार और नियामक एजेंसियां सख्त हो गई हैं। प्रदेश में हजारों मेडिकल स्टोर ऐसे हैं, जो बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इस पर अब काउंसिल ने सभी अस्पतालों, फार्मेसियों और मेडिकल स्टोर्स को नोटिस जारी कर चेताया है कि किसी भी गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा का वितरण, भंडारण या बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि ऐसा पाया गया, तो संबंधित मेडिकल स्टोर या संस्था का पंजीयन निरस्त कर दिया जाएगा। बता दें, इसको लेकर एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने इसे लेकर राज्य फार्मेसी काउंसिल को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। बिना फार्मासिस्ट के दवा बिक्री पर रोक एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल, भोपाल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 के तहत केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही दवाओं के वितरण या बिक्री में शामिल हो सकता है। इसके अलावा बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन दवा बेचने प...

बांध के डुबान क्षेत्र में रिसॉर्ट बनाना पर्यावरण नियम का उल्लंघन है

बरही गांव के पास, निजी रिसोर्ट है और दूसरा तांदुला डैम के पास। इसे पिछली सरकार के समय शासन ने ही बनाकर भिलाई की एक बड़ी कंपनी को कांट्रेक्ट पर दे दिया है। प्रदेश में इस तरह बांधों के आसपास, बैकवॉटर (उलट) क्षेत्र और यहां तक कि बांध के अंदर तक करीब 15 ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो शुरू हैं या शुरू होने वाले हैं या जिनका काम रुका हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक और बांधों के अस्तित्व पर खतरा बता रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बांध के भराव क्षेत्र में ही रिसॉर्ट बन रहे हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ में बढ़ते पर्यटन के चलते सरकार के साथ रियल स्टेट व्यापार से जुड़े लोगों और कारोबारियों ने जंगल के भीतर, नदियों-तालाबों, बांधों के किनारे पांच सितारा रिसॉर्ट बना लिए हैं। इनमें से कुछ जरूरी में मंजूरी ली गई, जबकि कुछ रिसोर्ट मनमाने तरीके से बनाए गए हैं। ऐसे लोग लेक व्यू नाम रखने के लिए बांधों के वेट लैंड पर कब्जा कर रहे हैं। बरही के पास बने रिसॉर्ट ने बांध की सूखी जमीन को ओपन रेस्टोरेंट का रूप का दे दिया है। यहां झूलों और बैठने की स्थाई सुविधा बना दी गई है। एक वॉटर फिल्टर प्लांट का निर्माण भी किया गया है, ताकि स...

40 हजार के एसी में 2 लाख 66 हजार मरम्मत खर्च

विधानसभा में सोमवार को कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने लोक निर्माण विभाग की ओर से बिलासपुर संभाग में किए गए वार्षिक मरम्मत विद्युतीकरण पर खर्च राशि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, भवन और स्थानों की जानकारी मांगी थी, लेकिन सिर्फ सेक्शन की जानकारी दी गई है। इस पर डिप्टी सीएम साव ने बताया, 2016-से 2024 की अवधि में 9156 स्थानों के कार्य कराए गए हैं। देयक में स्थान का उल्लेख नहीं होता, माप पुस्तिका में होता है। इस प्रश्न पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने डिप्टी सीएम को घेरा। उन्होंने कहा, एक एसी के रखरखाव में 2 लाख 66 हजार रुपए खर्च हुए। जबकि एक एसी 40 से 50 हजार रुपए में आ जाता है। सवाल-जवाब के बीच डिप्टी सीएम साव ने कहा, अगर किसी सब डिवीजन के बारे में कंप्लेंट है, तो जानकारी दे दें. उस पर जांच कराई जाएगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सवाल किया कि आपने 100 करोड़ का भुगतान कैसे कर दिया। फिर आप लोगों के गाइड लाइन ही क्यों जारी की है। इसकी क्या जरूरत पड़ गई? इस पर डिप्टी सीएम साव ने कहा कि शासकीय राशि का दुरुपयोग ना हो, इसके लिए अधिकारी समय-समय पर जानकारी देते रहते है। आपके नॉ...

बिना टेंडर 855 करोड़ का काम पीडब्ल्यूडी में हुआ

1 लाख रुपए से ज्यादा के काम में टेंडर जरूरी... पीडब्ल्यूडी में 855 करोड़ रुपए के काम नॉन एग्रीमेंट यानी बिना टेंडर के करा दिए गए। इनमें अकेले रायपुर डिवीजन-3 में 650 करोड़ रुपए के काम हुए हैं। यहां सिर्फ 64 वाउचर में ही 648.3 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है। यानी प्रत्येक वाउचर से 10 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। इसी तरह बिलासपुर में पीडब्ल्यूडी, सेतु विभाग में कुल 21.92 करोड़ रुपए के काम हुए हैं। नियमानुसार 1 लाख रुपए से ज्यादा के काम के लिए टेंडर जरूरी है। आपात स्थिति में ही बिना टेंडर के काम कराए जाते हैं। इसे नॉन एग्रीमेंट कहा जाता है। हालांकि ऐसे काम ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसके उलट पीडब्ल्यूडी ने सालभर में करोड़ों के नॉन एग्रीमेंट के काम कराए। धमतरी व ईएंडएम डिवीजन रायपुर में 10-10 करोड़ से अधिक के काम कराए गए। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार की आशंका इसी में नॉन एग्रीमेंट के कार्यों में भ्रष्टाचार की आशंका रहती है, क्योंकि इसमें पक्के दस्तावेज और टेंडर की पूरी प्रक्रिया नहीं होती। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही सिर्फ आपात स्थिति में ही नॉन एग्रीमेंट के काम की मंजूरी होती है। बिलासपुर में कुछ साल प...

भूमि आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जज, जनप्रतिनिधि, अफसर या पत्रकार को अलग श्रेणी में नहीं मान सकते

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, सांसदों, विधायकों, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों, पत्रकारों को रियायती मूल्य पर भूमि आवंटन के लिए अन्य की तुलना में अलग श्रेणी में नहीं माना जा सकता। शीर्ष अदालत ने संयुक्त आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 2005 में जारी किए गए उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें सांसदों, विधायकों, अखिल भारतीय सेवा/राज्य सरकार के अधिकारियों, सांविधानिक न्यायालयों के न्यायाधीशों और पत्रकारों को एक अलग वर्ग के रूप में मानते हुए रियायती दर पर भूमि आवंटित करने का आदेश दिया गया था। सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, नीति का उद्देश्य असमानता को कायम रखना है। नीति भेदभाव का सहारा लेकर एक लाभ प्राप्त वर्ग या समूह को अलग करती है और उदारता प्रदान करती है। आवंटन नीति मनमानी... पीठ ने कहा, आवंटन नीति मनमानी के साथ-साथ दो-आयामी वर्गीकरण परीक्षण की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रही है। पीठ ने महसूस किया कि विचाराधीन नीतियां यह दिखाने के लिए एक प्रासंगिक उदाहरण हैं कि केवल समान लोगों के साथ समान व्यवहार करने से अन्या...

भ्रष्‍टाचार एक कलंक है इसमें संलिप्त सबकी बराबर की है।

भ्रष्टाचार देश में लगा दीमक है जो अंदर से देश को खोखला बना रहा है खोखला ही नहीं पूरे चट कर जाता है।यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है जो यह दिखाता है व्यक्ति लोभ, असंतुष्टि, आदत और मनसा जैसे विकारों के वजह से कैसे मौके का फायदा उठा सकता है। भ्रष्टाचार वह अनैतिक आचरण है, जो व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं के लिए देश को संकट में डालने में देर नहीं करता है।हमारी देश की राजनितिक प्रणाली भ्रष्टाचार में भरी है देश में भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना, कार्यालय में जनता से घूस लेकर काम करना, भी भ्रष्टाचार कर स्वरूप है। आजकल की विडंबना यह है कि अगर ऐसे लोग रिश्वत लेने या देने के जुर्म में पकड़े भी जाते है, तो रिश्वत देकर छूट भी जाते है। कई दुकानदार और व्यापारी सस्ते वस्तुओं को अधिक दामों में बेचकर मुनाफा कमाते है।आजकल लोगों का लालच इतना बढ़ गया है कि यह आज हर जगह हो रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार कई प्रकार का होता है चाहे वह शिक्षा हो, खेल हो या प्रशासन विभाग हो या राजनीति हो हर जगह भ्रष्टाचार का रूप ...

जलाशय में खनन करने हेतु पर्यावरण विभाग एनओसी नहीं दे सकता

100 साल पुराने पेंड्रावन जलाशय खनन की फिर खुलेगी फाइलः हाईकोर्ट ने NOC रद्द करने पर विचार करने के दिए निर्देश, आंदोलनकारी बोले-CM से करेंगे मुलाकात रायपुर का 100 साल पुराने पेंड्रावन जलाशय। रायपुर के 100 साल पुराने पेंड्रावन जलाशय में अल्ट्राटेक कंपनी के प्रस्तावित खनन की फाइल फिर खुलेगी। दरअसल, जल संसाधन विभाग की तरफ से जारी खनन सहमति के लिए एनओसी को 20 मार्च 2017 को तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ने कंपनी का पक्ष सुने बिना रद्द कर दिया था। 25 अप्रैल 2024 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में कंपनी को सुनवाई का अवसर देने और 3 महीने के भीतर मामले को दोबारा निर्णय लेने का निर्देश जारी किया है। अब आंदोलनकारियों का कहना है कि, कंपनी के पक्ष में निर्णय ना आए। इसको लेकर सीएम साय से मुलाकात करेंगे। पेंड्रावन जलाशय को बचाने के लिए बीते 8 साल से संघर्ष जारी है। सरकार से खनन की अनुमति नहीं देने की अपील हाईकोर्ट के इस निर्देश पर छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल सदस्य आलोक शुक्ला और पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति के सचिव घनश्याम वर्मा ने राज्य सरकार से पेंड्रावन जलाशय में खनन की अनुमति नही...

कन्या छात्रावासो में छात्राओं को भगाकर कभी भी ताला लगा दिया जाता है

कालीबाड़ी एसटी-एससी हॉस्टल की छात्राओं ने गुरुवार को हॉस्टल वार्डन की मांग को लेकर कालीबाड़ी चौक पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा के पास प्रदर्शन किया। वार्डन के खिलाफ हाथों में तख्ती लिए खड़ी छात्राओं ने काफी देर तक नारे लगाए कि "आज का शिक्षक दिवस जेल में"। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डन की लापरवाही के कारण दो दिन से हॉस्टल में खाना नहीं बन रहा है। ऐन शिक्षक दिवस के दिन हुए प्रदर्शन से प्रशासन के अफसर भी हरकत में आ गए। पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने जैसे-तैसे उन्हें मनाकर वापस भेजा। शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास की छात्राओं आरोप लगा रही थीं कि वार्डन हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को प्रताड़ित करती है। हॉस्टल में नई वार्डन की नियुक्ति हो गई है इसके बावजूद पुरानी वार्डन आरती निकोसे अपना प्रभार नहीं छोड़ रही है। इस वजह से नई वार्डन चार्ज नहीं ले पा रही है। पिछले 2 दिन से वार्डन ने सभी कर्मचारियों को छुट्टी दे दी है। इस वजह से हॉस्टल में खाना नहीं बना है। बाकी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। किसी भी तरह की समस्या लेकर उनके पास जाते हैं तो वो ध्यान ...

कन्या छात्रावास में निशुल्क भोजन के बदले वसूल रहे 5-5 सौ रुपए, न क्वालिटी सही, न ही खाना भरपेट

पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास आरंग की छात्राओं ने मेस समिति के विरुद्ध की शिकायत छात्राओं ने शिकायत की है कि मेस समिति भरपेट और सही खाना उपलब्ध नहीं करा रही है। इसका विरोध करने पर समिति के सदस्य अभद्र व्यवहार करते हैं। इसकी जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर समिति को भंग कर दूसरी बनाएंगे। रायपुर जिले के आरंग में संचालित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास के मेस में छात्राओं को न ही भरपेट खाना नहीं मिल रहा है और न ही खाना की क्वालिटी सही है। छात्राओं ने छात्रावास की मेस समिति पर आरोप लगाया है कि घटिया और कम खाना देने का विरोध करने पर समिति के सदस्यों द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। इस शिकायत को लेकर छात्राओं ने आदिम जाति विकास विभाग कार्यालय पहुंचकर इसकी लिखित शिकायत की है। इधर इस मामले में विभाग के अधिकारी का कहना है कि मेस का संचालन छात्राओं का ही एक ग्रुप करता है। इस मामले की जांच की जाएगी। जांच में अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो मेस समिति को भंग कर दूसरी समिति बनाई जाएगी। आरंग स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास की 30-35 छात्राएं शुक्रवार को ...

छत्तीसगढ़ के सैकड़ो खदानों में नियमों का पालन नहीं, NMDC पर 16 अरब का जुर्माना

छत्तीसगढ़ में NMDC पर 16 अरब से ज्यादा का जुर्माना लगा है। यह जुर्माना किरंदुल प्लांट पर दंतेवाड़ा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने लगाया है। NMDC को स्वीकृत खनिपट्टों में अनियमितताओं का आरोप लगा है। 15 दिन के अंदर पैसे जमा करने का अल्टीमेटम भी दिया गया है। इस पर NMDC ने सफाई में कहा है कि, वर्तमान मामले में तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किए बिना जुर्माना लगाना पूरी तरह से अनुचित है। आदेश में लिखा-संतोषजनक जवाब नहीं मिला कलेक्टर की ओर से अधिशासी निदेशक के नाम पत्र लिखा गया है। यह पत्र NMDC लिमिटेड ग्राम किरन्दुल, तहसील बड़े बचेली, जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा को जारी किया गया है। इसमें डिपाजिट नंबर 14, एमएल रकबा 322.368 हेक्टेयर, डिपाजिट नं 14 एनएमजेड रकबा 506.742 हेक्टेयर, डिपाजिट नं 11 रकबा 874.924 हेक्टेयर का जिक्र है। साथ ही लिखा है कि, छत्तीसगढ़ खनिज नियम का उल्लंघन करने पर रायल्टी लगाई जा रही है। इसकी कुल राशि 16 अरब 20 करोड़ 49 लाख 52 हजार 482 रुपए है। इस अर्थदंड को 15 दिन के अंदर जमा करने का भी आदेश है। इससे पहले NMDC को 12/08/2024 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, जिसका जवाब स...

कलेक्टर पर अपराध दर्ज करने का आदेश

छत्तीसगढ़ रियल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (सीजी रेरा) बनने से बिल्डरों की मनमर्जी पर लगाम कसा है, लेकिन कई बिल्डर अब भी लोगों के खून पसीने की कमाई डकार रहे है। न्याय की जटिल प्रक्रिया में उन्हें उलझाकर रख रहे हैं। हालत यह है कि बिल्डर रेरा का आदेश नहीं मान रहे हैं, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन के कर्मचारी कलेक्टर का आदेश नहीं मान रहे हैं। इससे कई परिवार अपने हक के लिए भटक रहे हैं। किसी को 6 साल से, तो किसी को 8 साल में बिल्डरों ने फ्लैट-मकान नहीं दिए हैं। कई मामलों में न्यायालय ने जिला प्रशासन को बिल्डर से फ्लैट-मकान दिलाने का आदेश दिया है, लेकिन जिला प्रशासन आगे कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। उपस्थित नहीं हुए अधिकारी प्रशासनिक अनदेखी से हताश प्रार्थिया ने फिर रेरा अपीलेट ट्रिब्यूनल में शिकायत की। इस पर ट्रिब्यूनल ने लगातार चार बार जिला प्रशासन को कोर्ट की अवमानना के लिए नोटिस जारी किया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। ट्रिब्यूनल ने फिर 21 अगस्त 2024 को किसी जिम्मेदार अधिकारी को भेजने कहा था। लेकिन इस बार भी कोई उपस्थित नहीं हुआ। कब मिलेगा न्याय कमल विहार के पास आरएस ड्रीमलैंड के प्रोजेक्ट ई-2 में ...

राम वनगमन परिपथ निर्माण में गड़बड़ी की जांच लटकी

सिर्फ एक बार नोटिस देकर भूला पर्यटन विभाग, कागजी कार्रवाई में सिमटी अनियिमतता की जांच  राम वनगमन परिपथ योजना के तहत राज्य में पिछले पांच वर्षों में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व अनियमितता की जांच फिलहाल लटक गई है। मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री को 4 व 19 जनवरी 2024 को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 9 जनवरी 2024 को जांच के आदेश दिए थे। इस पर पर्यटन विभाग जांच के नाम पर कागजी कार्रवाई कर मात्र एक पत्र लिखकर भूल गया और अब तक जांच को ही ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश दिख रही है।  आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे की शिकायत पर सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 12 जनवरी 2024 को जांच के लिए नोटशीट शुरू की गई और वहीं से लीपापोती का खेल संबंधित विभाग की ओर से शुरु हो गया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में राम वनगमन परिपथ योजना के कार्य में अनियिमतता की शिकायत पर निर्माण एजेंसी को 1 फरवरी 2024 को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया था, जिनमें तापस कुमार स्वैन परियोजना निदेशक (छत्तीसगढ़) टीसीआईएल परियोजना कार्यालय पता म. नं-512 वीआईपी करिश्म...

लापरवाह आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मुकदमा कोर्ट में

21 अगस्त को इन अफसरों को कोर्ट के सामने उपस्थित होकर देना होगा जवाब। भू अर्जन की कार्रवाई किए बिना किसान के खेत पर कब्जा कर सड़क का निर्माण करा दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के चार साल बाद भी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया है। नाराज कोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले के तत्कालीन कलेक्टर यशवंत कुमार व जितेंद्र शुक्ला व दो अन्य अफसरों के खिलाफ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना के आरोप में चार्ज फ्रेम कर व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने 21 अगस्त की तिथि तय कर दी है। जांजगीर-केरा रोड निवासी कमलेश सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जिला प्रशासन के साथ ही पीडब्ल्यूडी व भूअर्जन अधिकारी द्वारा उसकी जमीन पर जबरिया कब्जा कर सड़क बनाने की शिकायत दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता किसान ने अपनी याचिका में बताया था कि ग्राम कोसा में खसरा नंबर 108/1 में उसकी जमीन है। उक्त जमीन में बिना भूमि अधिग्रहण किये प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कर दिया गया है। कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर विधिवत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई कर मुआवजा दिए जाने की मांग की थी। कलेक...

PHE अधिकारियों की लापरवाही से जनता बीमार हो रहा है

छत्तीसगढ़ में 40 गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में देवभोग तहसील के 40 गांव के लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को बेबस हैं। फ्लोराइड की पुष्टि 7 साल पहले हो गई थी, लेकिन आज भी लोग परेशानी से जूझ रहे हैं। फ्लोराइड युक्त पानी को पीने से लोगों के दांत पीले हो रहे हैं। हड्डियों की बीमारी हो रही है।  देवभोग तहसील के नांगलदेही गांव में हर घर में प्रभावित हैं। 5 साल के बच्चे से लेकर 55 साल के बुजुर्ग पर फ्लोराइड का असर दिखा। ग्रामीणों का दावा है कि 700 की आबादी वाले गांव में 300 से ज्यादा लोगों पर फ्लोराइड का असर है। 60 से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिनकी हड्डियों में समस्याएं आ गई हैं। देवभोग तहसील के 40 गांव के लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को बेबस। ग्रामीणों के दांत पीले बो रहे हैं। 40 गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा स्कूलों में लगे वाटर सोर्स की जांच में इसका खुलासा हुआ था। इसके बाद PHE विभाग ने सभी 40 स्कूलों में 6 करोड़ रुपए खर्च कर फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगवाया। इनमें से 9 ऐसे हैं, जो सोर्स और अन्य तकनीकी खामियों के कारण शुरू भी नहीं हो सके। 4 माह चले और देख-र...