जिले में अवैध फ्लाईऐश का मामला लगातार सामने आ रहा है। इस बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जो चौंकाने वाला है। लैलूंगा पुलिस ने जिस फ्लाईऐश के 9 वाहनों को अवैध डंपिंग करने के मामले में पकड़ा था। वहीं जब आगे की कार्रवाई के लिए मामला पर्यावरण विभाग के सुपुर्द किया तो विभाग ने यह कहते हुए मामले को क्लीन चिट दिया कि संबंधितों को पास फ्लाईऐश डंप करने की अनुमति दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि उनके पास अनुमति थी तो वे पुलिस को क्यों नहीं दिखाए। वहीं दो दिन बाद इसकी अनुमति कहां से आ गई। उल्लेखनीय है कि बीते 24 दिसंबर को लैलूंगा पुलिस ने ग्राम सोहनपुर में अवैध रूप से फ्लाई ऐश डंप किए जाने के मामला उजागर किया था। पुलिस ने मौके से 7 हाइवा और 2 ट्रेलर वाहन जब्त किए। पुलिस को सूचना मिली कि फ्लाईऐश बिना किसी वैधानिक अनुमति के ट्रेलर वाहनों के माध्यम से ग्राम सोहनपुर क्षेत्र में खुलेआम डंप किया जा रहा है। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस तो वाहन फ्लाईऐश अनलोड करते पाए गए। चालकों से पूछताछ की गई, लेकिन वे फ्लाई ऐश परिवहन और डंपिंग से संबंधित कोई वैध अनुमति अथवा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
पीडब्ल्यूडी में सफाई के ठेके पर अफसरों की मनमानी जारी है। सफाई के ठेके की अवधि दो साल पहले समाप्त हो चुकी थी, लेकिन इसके तीन साल बाद टेंडर तो लगाया गया, पर उसे ओपन नहीं किया गया। उल्टे ठेकेदार का समय बढ़ाते रहे। इस बात की जानकारी उच्च अधिकारियों को लगी, तो उन्होंने चर्चा के लिए बुलाया। बताया जा रहा है कि टेंडर में मनमाने ढंग से ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तें जोड़ी गईं। हाईकोर्ट में सफाई का ठेका पीडब्ल्यूडी के माध्यम से होता है। वर्तमान टेंडर मार्च 2023 में समाप्त हो चुका है और इसका काम सतीष कुमार सिंह कर रहे हैं। नियमानुसार टेंडर समाप्त होने के बाद नया टेंडर लग जाना था। पहला टेंडर 4 जुलाई 2023 को लगाया गया था, जिसे 6 जुलाई 2023 को ओपन होना था, लेकिन ओपन नहीं किया गया। दूसरा टेंडर 29 सितंबर 2023 को लगाया गया था, जिसे 4 अक्टूबर 2023 को ओपन होना था, लेकिन इसे भी ओपन नहीं किया गया। तीसरी बार टेंडर 16 फरवरी 2024 को लगाया गया, जिसे 20 फरवरी 2024 को ओपन होना था, लेकिन यह भी ओपन नहीं हुआ। अधिकतम दर और ठेकेदार पर मेहरबानी यह टेंडर 1.462 फीसदी अधिकतम दर पर लगाया गया। बता दें कि यह टेंडर...
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