सिर्फ एक बार नोटिस देकर भूला पर्यटन विभाग, कागजी कार्रवाई में सिमटी अनियिमतता की जांच
राम वनगमन परिपथ योजना के तहत राज्य में पिछले पांच वर्षों में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व अनियमितता की जांच फिलहाल लटक गई है। मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री को 4 व 19 जनवरी 2024 को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 9 जनवरी 2024 को जांच के आदेश दिए थे। इस पर पर्यटन विभाग जांच के नाम पर कागजी कार्रवाई कर मात्र एक पत्र लिखकर भूल गया और अब तक जांच को ही ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश दिख रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे की शिकायत पर सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 12 जनवरी 2024 को जांच के लिए नोटशीट शुरू की गई और वहीं से लीपापोती का खेल संबंधित विभाग की ओर से शुरु हो गया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में राम वनगमन परिपथ योजना के कार्य में अनियिमतता की शिकायत पर निर्माण एजेंसी को 1 फरवरी 2024 को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया था, जिनमें तापस कुमार स्वैन परियोजना निदेशक (छत्तीसगढ़) टीसीआईएल परियोजना कार्यालय पता म. नं-512 वीआईपी करिश्मा के पीछे मोवा वीआईपी इस्टेट रोड आदर्श नगर रायपुर और वी. अरूण देव प्रोजेक्ट मैनेजर वॉप्कोस लिमिटेड 29/ ई अनुपमनगर रायपुर शामिल है।
सोशल ऑडिट कराने का निर्णय
पर्यटन विभाग व छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों का कहना है कि श्रीराम वनगमन परिपथ निर्माण पर विवाद के संबंध में राज्य शासन द्वारा सोशल ऑडिट कराए जाने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही सोशल ऑडिट कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
पहले चरण में नौ स्थलों का चयन
छत्तीसगढ़ के उत्तर में स्थित सरगुजा से लेकर दक्षिण स्थित सुकमा तक भगवान श्रीराम से जुड़े स्थानों, प्राचीन अवशेषों की एक पूरी श्रृंखला प्राप्त होती है, जिनसे लोक आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। राम वनगमन पर्यटन परिपथ ऐसे स्थानों को आपस में जोड़कर उन्हें विकसित करने की परियोजना है। राज्य में भगवान श्रीराम से जुड़े 75 स्थानों की पहचान की गई है। परियोजना के पहले चरण में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार-भाटापारा), चंदखुरी (रायपुर), राजिम गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) व रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के परिसर, शिवरीनारायण, राजिम, रामगढ़ व सिहावा में विकास व सौंदर्याकरण कार्य पूरा कर लोकार्पित किया जा चुका है। इस परियोजना के तहत करीब 65 से 70 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है।

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