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मुनगा स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक है

न्यूट्रीशन का खजाना, बीपी, डायबिटीज से लेकर कैंसर की ग्रोथ को रोकने में मददगार सहजन, सेंजन, ड्रमस्टिक्स, मोरिंगा, मुनगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। नाम कोई भी हो, इसके गुण हर जगह एक जैसे हैं। सहजन मानो सिर्फ एक पेड़ नहीं, मनुष्य को दिया प्रकृति का वरदान है। कोई ऐसा दूसरा पेड़ नहीं, जिसकी जड़ से लेकर पत्ती, फल, ठंडल और यहां तक कि फूल भी इतने सारे न्यूट्रीशन से भरपूर हो। ये डॉक्टर की फार्मेसी है। इसीलिए लोग सहजन को सुपरफूड कहते हैं। न्यूट्रीशन साइंटिस्ट्स का मानना है कि सहजन छोटी-बड़ी 300 से ज्यादा बीमारियों में फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम जैसे ढेरों न्यूट्रिएंट्स होते हैं। सहजन में मल्टीविटामिन्स और कई एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। सहजन खाने से डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी लाइफ स्टाइल बीमारियां दूर रहती है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और स्किन हेल्थ भी सुधरती है। आज बात करेंगे सुपरफूड सहजन की। साथ ही जानेंगे कि- • सहजन खाने से किस तरह के फायदे होते हैं? • इसे खाने से कौन-कौन सी बीमारियों में लाभ मिलता है? इंसानों के लिए प्...

केमिकल वाले आम की पहचान का उपाय

केमिकल और पेस्टिसाइड हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में केमिकल से पके आम भी अपने साथ कई हेल्थ इश्यूज लाते हैं। ऐसे करें केमिकल से पके आम की पहचान भारत में ऐसे कई लोग हैं जो गर्मियों का इंतजार आम खाने के लिए भी करते हैं। शायद ही कोई ऐसा हो जिसे मीठे, रसीले आम पसंद न हो। लेकिन फलों का राजा आम को केमिकल की नजर लग चुकी है। आम को जल्दी पकाने से लेकर उसे रसीला दिखाते तक के लिए कई केमिकल्स का यूज किया जाता है। ये केमिकल आपकी सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं। ऐसे में आम खरीदते समय आपको केमिकल फ्री आमों की पहचान होना जरूरी है। क्योंकि केमिकल से पके आमों में अक्सर कैल्शियम कार्बाइड नामक केमिकल होता है। यह पेट में गैस, सूजन और दस्त का कारण बन सकता है। कई अध्ययनों के अनुसार केमिकल से पके आमों का ज्यादा सेवन करने से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इन आमों में विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम हो सकती है और हानिकारक टॉक्सिन ज्यादा होते हैं, जो हार्ट डिजीज, डायबिटीज और किडनी डिजीज का कारण बन सकते हैं। कई बार पेस्टिसाइड के कारण स्किन एलर्जी होने का खतरा भी रहता है। केमिकल से पके आमों में विटामिन...

लगातार बैठे रहने पर 10 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान

कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये एक्सरसाइजः एक जगह बैठे रहना 10 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक, बॉडी मूवमेंट है जरूरी मेहनत करना किसे पसंद है। एक जगह पसरकर बैठे रहो। आराम से काम करना आमतौर पर हर किसी को पसंद आता है। खासकर जब आराम से कुर्सी पर बैठकर AC की हवा ले रहे हों। सही मायने में यही 'व्हाइट कॉलर' जॉब है क्योंकि इसमें फिजिकल वर्क की जगह AC में कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं। इस मॉडर्न लाइफ स्टाइल में बैठना जीवन का हिस्सा बन गया है। चाहे वह काम करते समय कम्प्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठना हो, घर जाते समय बैठकर गाड़ी चलाना हो या रात में घंटों बैठकर OTT पर कोई पसंदीदा शो देखना हो। बैठना हमारे दिन का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन यह हमारी सेहत पर भी गलत प्रभाव डालता है। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से मोटापा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, पीठ या जोड़ों में दर्द, मसल्स पेन जैसी शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए आज बात डेस्क जॉब एक्सरसाइज की। साथ ही जानेंगे कि- • किस तरह की एक्टिविटी करना जरूरी है? • क्या लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से हार्ट डिजीज का खतरा है? एक्सपर्ट- डॉ. अकबर नकवी, फिजिशियन (...

फ्रिज में कितने दिन सुरक्षित रहता है रोटी, फल, सब्जी

रोटी, चावल, फल-सब्जी की शेल्फ लाइफ कितनी, क्या फ्रिज में नष्ट होते न्यूट्रिएंट्स फ्रिज हमारे किचन के सबसे जरूरी एप्लायंसेज में से एक है। फ्रिज का इस्तेमाल खाने की चीजों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है। आमतौर पर फ्रिज में अंडे, सब्जियां, फल, डेयरी प्रोडक्ट्स, आइसक्रीम, चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक्स जैसी खाने-पीने की चीजों को स्टोर किया जाता है। फ्रिज की जरूरत सबसे ज्यादा तब महसूस होती है, जब खाना बच जाए और उसे खराब होने से बचाना हो। लेकिन फ्रिज में रखा खाना कितने समय तक सुरक्षित रहेगा, इसके बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि कई बार लोग लंबे समय तक फ्रिज में रखा खाना खाने से अपच, पेट दर्द या फूड पॉइजनिंग का शिकार हो जाते हैं। असल में फ्रिज में खाना रखने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह खराब नहीं होगा। फ्रिज में रखने के बाद भी हर खाने की एक समय सीमा होती है। इसके बाद वह खराब हो सकता है या उसके स्वाद में अंतर आ सकता है। इसलिए आज जरूरत की खबर में बात करेंगे फ्रिज में खाना रखने की समय सीमा क्या है। साथ ही जानेंगे कि- • क्या फ्रिज में खाना रखने से उसके न्यूट्रिएंट्स...

फ्रिज का पानी पीने से मेटाबॉलिज्म स्लो होता है

चिल्ड पानी से मेटाबॉलिज्म स्लो होता है, हार्ट रेट कम, मटके का पानी सुरक्षित गर्मी के महीने में जब गला सूखता है तो ठंडे पानी से राहत मिलती है। ठंडा पानी गले को तर करता है, शरीर को ठंडक पहुंचाता है। अगर ये पानी मटके का है तो अच्छी बात है। लेकिन अधिकांश बार पानी सिर्फ ठंडा नहीं, बल्कि बहुत ठंडा होता है। एकदम चिल्ड। कई बार लोग उसमें ढेर सारी बर्फ भी मिला देते हैं। अब तो लगभग हर घर में यह चलन है। गर्मियां आते ही फ्रिज में ठंडे पानी की बोतलें जम जाती हैं। जरा सी प्यास लगी और फ्रिज से ठंडे पानी की बोतल निकालकर गला तर कर लिया। असल में इससे गर्मी में तप रहे शरीर को तो राहत मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इससे आपके शरीर को कितना नुकसान हो रहा है? आयुर्वेद में तो ठंडा पानी पीने की मनाही है। आयुर्वेद के मुताबिक ठंडा पानी शरीर में असंतुलन और विकार पैदा कर सकता है। यह पाचन तंत्र को धीमा कर सकता है। फ्रिज में पानी को आर्टिफिशियल तरीके से ठंडा किया जाता है। शरीर के लिए इसे किसी भी मौसम में पीना अच्छा नहीं है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि फ्रिज में रखा ठंडा पानी पीने का क्या नुकसान है।...

आवाज शराब सिगरेट से भी खराब होता है

क्यों बनते हैं वोकल नोड्यूल्स, हो सकता है बीमारी का संकेत, बरतें सावधानी पृथ्वी पर अरबों प्रजाति के छोटे-बड़े जीव रहते हैं। लेकिन उनमें कुछ ही जीव ऐसे हैं, जिनके पास भाषा है। जो मुंह से बोलकर अपने विचार और भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं। इन सभी जीवों में मनुष्य सबसे यूनिक है। मनुष्य की बोली सबसे खास है क्योंकि हमारे पास न सिर्फ आवाज बल्कि लिपि भी है। इसके सहारे ही तो हम बोलकर और लिखकर एक-दूसरे के दुख-दर्द और राजी-खुशी कह-सुन पाते हैं। भाषा ही हमें एक-दूसरे के करीब ले जाती है। फर्ज कीजिए कि एक दिन प्रकृति इसी बोली को हमसे छीन ले तो इस गूंगे संसार में हम कैसे रह पाएंगे। प्रकृति ने हमें यह नायाब तोहफा दिया है, लेकिन कई बार अपनी गलत आदतों और गलत लाइफ स्टाइल के चलते हम इस नायाब तोहफे के साथ खिलवाड़ करते हैं। खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान हमारी आवाज को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यही कारण है कि गले और आवाज से जुड़ी बीमारियों में भी इजाफा हो रहा है। आज हम बात करेंगे वोकल कॉर्ड के बारे में। साथ ही जानेंगे कि- • क्या आवाज में बदलाव किसी बीमारी का लक्षण है? • किस तरह के खानपान से आवाज खराब हो सकती है?...

लिवर किडनी के लिए गन्ना रस लाभदायक

प्रकृति का दिया सबसे मीठा तोहफा है गन्नाः लिवर, किडनी की बीमारियों में लाभकारी, डायबिटीज है तो बनाएं दूरी भारत में हर खुशी के मौके पर मिठाइयां खाने और खिलाने की परंपरा है। त्योहार हो या कोई शुभ कार्य, हर किसी का पहला रिएक्शन होता है- 'कुछ मीठा हो जाए।' निश्चित ही प्रकृति ने भी खुशी का कोई बड़ा मौका देखा होगा, जब इंसान को सबसे मीठे तोहफे के रूप में गन्ना दिया। लेकिन प्रकृति के दिए उस मीठे और हमारी मिठाई वाले मीठे में बडा फर्क है। हम जो मिठाई खाते हैं, वह किसी का भी ब्लड शुगर लेवल शूट अप कर सकती है, बीमार कर सकती है। वहीं गन्ना धरती पर एक वरदान जैसा है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बेहद गुणकारी होता है। गन्ने का रस लिवर, किडनी की कई बीमारियों में भी लाभकारी है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एंडोक्रोनोलॉजी विभाग में प्रोफेसर और मेटाबॉलिकल जैसी रेवोल्यूशनरी किताब लिखने वाले डॉ. रॉबर्ट लस्टिंग अगस्त, 2011 में गूगल के ऑफिस में लेक्चर दे रहे थे। किसी सवाल के जवाब में उन्होंने कमरे में मौजूद लोगों से पूछा, "प्रकृति की दी सबसे मीठी चीज कौन सी है?" जाहिर है, सबका एक ही जवाब था...

बैड मूड का कारण बैड फुट भी होता है

पेट शरीर का दूसरा दिमाग, पेट में हेल्दी फूड जाएगा तो मन रहेगा खुश, दिमाग एक्टिव दिल की भावनाओं के बारे में तो आपने सुना ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पेट की भी कुछ भावनाएं होती हैं, जिसे 'गट फीलिंग' कहते हैं। अनहेल्दी खाने से पेट की भावनाएं आहत भी हो सकती हैं और इसका सीधा असर हमारे मूड और रिश्तों पर पड़ता है। जी हां, ये कोई रूमानी बात नहीं है। साइंस जर्नल 'ब्रेन, बिहेवियर एंड इम्यूनिटी' में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक इंसानी मूड और खाने का सीधा संबंध है। इस रिसर्च के मुताबिक अगर गट फीलिंग अच्छी हो तो स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन दूर रहते हैं। इस तरह से खुद के साथ और दुनिया के साथ रिश्ता मधुर बन सकता है। दूसरा दिमाग है पेट, इसे खुश रखने से आएंगी जीवन में खुशियां 'ब्रेन, बिहेवियर एंड इम्यूनिटी' की रिसर्च के मुताबिक दिमाग के अलावा पेट में भी बड़ी संख्या में न्यूरॉन्स मौजूद होते हैं। ये न्यूरॉन्स दिमाग तक सूचना लाने, ले जाने का काम करते हैं। पेट में 60-70 करोड़ न्यूरॉन्स होने की वजह से पेट सूचनाओं के आदान-प्रदान में काफी अहम हो जाता है। पेट की स्थिति क...

अच्छी नींद से भी बर्न होता है फैट

नींद में भी वजन घटाने में मददगार हैं ये 5 तरीके कैसा हो, यदि आप सोकर वजन घटा सकें? सुनने में थोड़ा चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन यह सच है। अगर कुछ आदतों को अपनाया जाए तो नींद के दौरान भी शरीर में जमा फैट को कम किया जा सकता है। आज जानिए विज्ञान आधारित ऐसे ही पांच तरीकों के बारे में. नींद गहरी हो तो फैट तेजी से बर्न होता है डीप स्लीप नींद की वह अवस्था है, जब शरीर प्रभावी तरीके से फैट बर्न करता है। रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद इस प्रक्रिया को बढ़ाती है। गहरी नींद के लिए बेड टाइम रूटीन जरूरी है। सोने से लगभग दो घंटे पहले गैजेट्स बंद कर दें। बेडरूम ठंडा रखें। कमरे का वातावरण खुशनुमा रखें। सोने का रूटीन बनाएं, हॉर्मोन बेहतर काम करते हैं जब आप रोज तय समय पर सोते और जागते हैं तो शरीर फैट बर्न करने वाले हॉर्मोन जैसेकि ग्रोथ हॉर्मोन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करता है। इसके अलावा यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को नियंत्रित करता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है। इसलिए वीकेंड में भी तय समय पर ही सोएं और जागें। इससे शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिद्म बेहतर होगी। इंटरमिटेंट फास्टिंग से नींद में फैट ...

बार बार बाल सीधे कराना शरीर को बनायेगा बीमारियों का घर।

सैलून में बाल सीधा करवाना पड़ा भारी ! महिला की हो गई किडनी खराब एक 26 साल की महिला को बार-बार सैलून में बाल सीधा कराने का खामियाजा भुगतना पड़ा। उसे किडनी खराब होने की समस्या हो गई। गौर करने वाली बात ये है कि महिला को पहले सेहत संबंधी कोई परेशानी नहीं थी। दरअसल, महिला जून 2020, अप्रैल 2021 और जुलाई 2022 में बाल सीधा कराने के लिए सैलून गई थी। हर बार सैलून जाने के बाद उसे उल्टी, दस्त, बुखार और पीठ दर्द की शिकायत होती थी। साथ ही बालों को सीधा कराते वक्त स्कैल्प पर जलन भी महसूस होती थी और जल्द ही सिर पर घाव भी हो जाते थे। जांच में पता चला कि उसके पेशाब में खून आ रहा था, लेकिन किसी तरह के इंफेक्शन के लक्षण नहीं मिले। सीटी स्कैन से पता चला कि महिला की यूरिनरी सिस्टम, जिसमें किडनी, ब्लैडर, योरेटर और यूरेथ्रा शामिल हैं, में कोई रुकावट नहीं है। जांच में पता चला कि महिला के बाल जिस क्रीम से सीधे किए जा रहे थे, उसमें ग्लाइऑक्सिलिक एसिड (Glyoxylic acid) नाम का रसायन था। यही रसायन महिला के स्कैल्प में जलन और घाव का कारण बना। चूहों पर किया गया प्रयोग डॉक्टरों ने इस मामले की बेहतर समझ के लिए चूहों पर ...

7 घंटे से कम सोना हाई ब्लड प्रेशर को देगा न्योता।

अगर आप रात में सात घंटे से कम सोते हैं, तो समय के साथ हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) होने का खतरा बढ़ सकता है, यह एक नए अध्ययन के अनुसार सामने आया है। अगर आप रात में सात घंटे से कम सोते हैं, तो समय के साथ हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) होने का खतरा बढ़ सकता है, यह एक नए अध्ययन के अनुसार सामने आया है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के वार्षिक वैज्ञानिक सत्र में अपने ताजा निष्कर्षों को प्रस्तुत करते हुए शोधकर्ताओं ने बताया कि हालांकि पिछले अध्ययनों में नींद और हाई ब्लड प्रेशर के बीच संबंध पाया गया था, लेकिन रिपोर्ट में इसकी पुष्टि करने वाले सबूतों में एकरूपता नहीं थी। कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है जनवरी 2000 से मई 2023 के बीच किए गए 16 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में छह देशों के 10,44,035 लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले कभी हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) की समस्या नहीं थी। अध्ययन के नतीजों से पता चला है कि कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) का खतरा बढ़ जाता है, भले ही उम्र, लिंग, शिक्षा, बॉडी मास इ...

सोशल मीडिया की लत कर रही बचपन को तहस-नहस, जिंदगी भर का हो सकता है नुकसान

दिन भर स्मार्टफोन में घुसे रहने और सोशल मीडिया की लत के नुकसान के बारे में हमें खूब बताया जाता है। इसके नुकसान जानने के बाद लोग संकल्प भी लेते हैं कि अब से स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम किया करेंगे। लेकिन हालिया स्टडी बताती है कि जरूरत से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल और सोशल मीडिया की लत सेहत संबंधी कुछ ऐसी परेशानियां खड़ी कर सकती हैं, जो जीवन भर बनी रहेंगी। भले ही कोई फोन या सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दे।  जिंदगी से सभी अहम मोड़ पर नुकसान पहुंचाएगा सोशल मीडिया की लत  स्कूल जाने वाले बच्चे कम उम्र में सोशल मीडिया के आदी हो जाएं तो इससे उनके दिमाग पर परमानेंट नकारात्मक असर पड़ सकता है। मोबाइल की लत पूरी तरह से छोड़ने के बाद भी इस असर को दूर कर पाना संभव नहीं होगा। यह असर ताउम्र उनके साथ बना रहेगा और जिंदगी से सभी अहम मोड़ पर नुकसान पहुंचाएगा। ये बातें कनाडा में हुई एक हालिया रिसर्च में सामने आई हैं। रिसर्च के मुताबिक कम उम्र में सोशल मीडिया की लत पूरे जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।  विकास में अवरोध बनता स्मार्टफोन रिसर्च के मुताबिक बचपन और किशोरावस्था में...

एंजियोप्लास्टी से कैसे कम होता है हार्ट अटैक का खतरा, एंजियोप्लास्टी की वजह से चर्चा में क्यों हैं अमिताभ बच्चन

हाल ही में अमिताभ बच्चन की एंजियोप्लास्टी की फेक न्यूज वायरल हुई। खुद अमिताभ को सामने आकर एंजियोप्लास्टी की बात को इसे ‘झूठी खबर’ बताना पड़ा। एक आंकड़े के अनुसार, भारत में हर साल तकरीबन 4.5 लाख हार्ट के मरीज एंजियोप्लास्टी कराते हैं। वहीं, देश में 4 से 5 करोड़ लोग इस्चेमिक हार्ट डिजीज (IHD) से पीड़ित हैं। यह देश में होने वाली 15 से 20% मौतों की वजह बनती है। इस मामले में हार्ट की आर्टरीज संकरी होने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बनती है। इसी तरह एंजियोप्लास्टी तब कराई जाती है, जब आर्टरीज में बैड कोलेस्ट्रॉल या खून के थक्के जमा होने से ब्लॉकेज बनने लगते हैं। इसी ब्लॉकेज की वजह से आर्टरीज से हार्ट को ब्लड की सप्लाई कम होने लगती है। जिससे हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि सीढ़ियां चढ़ने पर या वजन उठाने पर सीने में दर्द जैसी परेशानी होने पर लोग पहले ही एंजियोप्लास्टी करा लेते हैं। एंजियोप्लास्टी कब करानी चाहिए? एंजियोप्लास्टी के बाद क्या करें? एक्सपर्ट: डॉ. मनीष बंसल, वरिष्ठ निदेशक, क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, कार्डियक केयर, मेदांता, गुरुग्राम एंजियोप्लास्टी क्...

अधिक मात्रा में विटामिन बी3 (नियासिन) का सेवन दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है

जयपुर/ हाल के एक अध्ययन में पाया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में विटामिन बी3 (Vitamin B3) या नियासिन (Niacin) का सेवन धमनियों में सूजन (Niacin se dil ki bimari) पैदा कर सकता है, जिससे दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन के नतीजे नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। हाल के एक अध्ययन में पाया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में विटामिन बी3 (Vitamin b3) या नियासिन (Niacin) का सेवन करने से धमनियों में सूजन आ सकती है, जिससे दिल का दौरा या (Niacin se dil ki bimari) स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन के नतीजे नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन में 1,100 से अधिक लोगों को शामिल किया गया था। वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर में जब बहुत अधिक मात्रा में नियासिन (Niacin) होता है, तो वह 2PY और 4PY नामक दो अणु बनाता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि इन दोनों अणुओं का स्तर जितना ज्यादा होता है, दिल की बीमारी का खतरा भी उतना ही बढ़ जाता है। विटामिन बी3 क्या है?  विटामिन बी3 (Vitamin b3), जिसे नियासिन के नाम से भी जाना जाता है, शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए जरूरी है। ...

दुनिया का सबसे अनमोल सुख है चैन की नींद, अच्छी नींद दूर रखता है बिमारियों को

अगर सवाल किया जाए कि इस दुनिया का सबसे अनमोल सुख क्या है, तो सबके अलग-अलग जवाब हो सकते हैं। कोई कहेगा अच्छा खाना, कोई अच्छी ड्रिंक बताएगा, कोई सेक्स, तो कोई नींद कहेगा…। सभी चीजों पर गौर किया जाए तो असल में हमारी दुनिया में अच्छी नींद से आनंददायक कुछ नहीं हो सकता। बड़ी बात ये है कि नींद सिर्फ आनंद तक सीमित नहीं है। अच्छी नींद, अच्छी सेहत का भी राज होती है। लेकिन भारत के लोगों को अच्छी और पूरी नींद नहीं मिल पा रही है। लोकल सर्कल्स की एक स्टडी के मुताबिक, भारत के 55% लोग ऐसे हैं, जिन्हें हेल्दी नींद नहीं मिल रही है। ये लोग या तो गहरी नींद में नहीं सो पाते या फिर 6 घंटे से कम सो पाते हैं। देश में 2.5 करोड़ लोग तो स्लीप एप्नीया से जूझ रहे हैं। अच्छी नींद का मतलब क्या है और इसके क्या फायदे हैं? नींद पूरी नहीं होने से क्या नुकसान हो सकते हैं? लोगों को क्यों नहीं मिल पा रही हेल्दी नींद? जरूरी है हेल्दी और कंप्लीट नींद आपने लोगों को कहते सुना होगा कि जब हम सोते हैं तो दूसरी दुनिया में होते हैं। असल में सोते समय हम अचेतन अवस्था में चले जाते हैं। अपने आसपास की दुनिया से एकदम बेखबर, कई बार सपनों ...

40 से ऊपर उम्र वालों को करवा लेना चाहिए ये हेल्थ टेस्ट, समय पर बच जायेंगे खतरे से

अगर आपके परिवार में मोतियाबिंद (Cataracts) की बीमारी है, आपकी उम्र 40 साल से अधिक है या आंखों में दर्द, दबाव, सिरदर्द या रोशनी के आसपास इंद्रधनुषी रंग का हल्का दिखाई देता है, तो आंखों की जांच (Eye examination) करवाना जरूरी है. इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से ग्लूकोमा (Glaucoma) से जुड़ी आंखों की परिधीय दृष्टि स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है. लखनऊ: अगर आपके परिवार में मोतियाबिंद (Cataracts) की बीमारी है, आपकी उम्र 40 साल से अधिक है या आंखों में दर्द, दबाव, सिरदर्द या रोशनी के आसपास इंद्रधनुषी रंग का हल्का दिखाई देता है, तो आंखों की जांच करवाना जरूरी है. इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से ग्लूकोमा (Glaucoma) से जुड़ी आंखों की परिधीय दृष्टि स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है. 40 से ऊपर के लोगों के लिए आंखों की जांच करवाना महत्वपूर्ण केजीएमयू के नेत्र विभाग के फैकल्टी सिद्धार्थ अग्रवाल का कहना है कि ग्लूकोमा (Glaucoma) आंखों के अंदर तरल पदार्थ के जमा होने से होता है, जिससे दबाव बढ़ जाता है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने नियमित रूप से आंखों की जांच (Eye examination) करवाने, खासकर 40 से ऊपर...

एक व्यक्ति ने 217 बार लगवाया कोरोना वैक्सीन, वैज्ञानिकों को हैरान किया

जयपुर/ जर्मनी में एक 62 वर्षीय व्यक्ति ने दावा किया है कि उन्होंने 200 से अधिक बार कोविड-19 का टीका लगवाया है। यह बात सुनकर वैज्ञानिकों को भी हैरानी हुई है और अब वे इस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) की जांच कर रहे हैं। जर्मनी में एक बुजुर्ग व्यक्ति की अनोखी कहानी आई सामने, जिन्होंने 29 महीनों में 217 बार कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन लगवाई है। इस अनोखी गवाही ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। उनके शरीर में कोई अवांछित प्रभाव नहीं हुआ और न ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हुई। अब वैज्ञानिक इस अनोखे मामले की जाँच कर रहे हैं। यह घटना वैक्सीन की प्रभावकारिता पर नए सवाल उठाती है। 217 बार लगवाया कोरोना वैक्सीन  म्यूनिख और वियना के अस्पतालों में एक अजीब घटना की खबर सामने आई है। जहां एक व्यक्ति ने कोविड-19 (Covid-19) के टीके को 217 बार लगवाया है। यह खबर न केवल वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है, बल्कि अस्पतालों के डॉक्टरों को भी उत्सुकता से भरा है। वे इस अद्भुत मामले की जांच के लिए व्यक्ति से संपर्क किया हैं और उन्हें अपने अस्पताल में आमंत्रित किया है। डॉक्टरों का मुख्य...