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फुंडा स्कूल के बच्चे पढ़ाई में नंबर वन है

शासकीय प्राथमिक शाला कुंडा में मात्र दो शिक्षकों की पदस्थापना के बावजूद छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक स्तर अत्यंत सराहनीय पाया गया। निरीक्षण के दौरान सभी बच्चे अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप दक्ष दिखाई दिए। लगभग सभी विद्यार्थियों ने अंग्रेजी का धारा-प्रवाह वाचन किया तथा बीस तक के पहाड़े सभी बच्चों को पूर्णतः कंठस्थ थे। विद्यार्थियों की उपस्थिति भी 50 प्रतिशत से अधिक पाई गई, जो बच्चों की सीखने में रुचि और शिक्षकों के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। डीईओ ने इन उत्कृष्ट परिणामों के लिए संस्था की दोनों शिक्षिकाएं देवकुमारी वर्मा एवं संगीता बोरकर की प्रशंसा की। इससे बाकि के स्कूलों को सीख लेनी चाहिए।

पाटन के एक स्कूल में शिक्षक पढ़ाने के बजाय गप्पे मारते मिले

जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा के औचक निरीक्षण ने पाटन ब्लॉक के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। कई शिक्षक बिना अवकाश आवेदन के अनुपस्थित मिले। कक्षाओं के समय कुछ शिक्षक स्टाफ रूम में बैठे दिखे। विद्यार्थियों की उपस्थिति बेहद कम रही। कुछ कक्षाओं में तो एक भी छात्र मौजूद नहीं था। प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक यही हाल रहा। ग्रामीणों ने भी शिक्षकों की लापरवाही की शिकायतें की मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।  डीईओ के निरीक्षण के दौरान स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय कन्या पाटन में कई अनियमितताएं सामने आई। यहां कल्पना वर्मा और पूजा अग्रवाल बिना अवकाश आवेदन के अनुपस्थित पाई गई। ऑनलाइन अवकाश पोर्टल में भी उनका कोई आवेदन दर्ज नहीं था। इसी विद्यालय में सहायक ग्रेड-3 आरती यादव, फरवरी की शुरुआत से लेकर निरीक्षण तिथि तक उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं कर रही थीं। कक्षा 11वीं में अर्थशास्त्र के कालखंड के दौरान व्याख्याता त्रिवेणी साहू कक्षा में पढ़ाने के बजाय स्टाफ रूम में बैठी हुई थी। अधिकांश शिक्षक कक्ष...

बिना आंख वाले शिक्षक पढ़ाने में है नंबर वन

सरकारी स्कूलों में घटते एडमिशन के बीच रतनपुर के एक प्राथमिक स्कूल ने सकारात्मक मिसाल पेश की है। गांधी नगर स्थित स्कूल में इस साल 17 प्रतिशत ज्यादा बच्चों ने दाखिला लिया है। इसके पीछे स्कूल के प्रधानपाठक मुकुटमणि तिवारी का पूर्ण समर्पण है, जो पिछले 13 वर्षों से दृष्टिबाधित होने के बावजूद नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके पढ़ाने का तरीका ऐसा है कि स्कूल में कक्षा-2 में पढ़ने वाले बच्चे 25 तक का पहाड़ा एक सांस में बता देते हैं। प्रधानपाठक तिवारी अब सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए मिसाल बन चुके हैं। उन्हें इस साल उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से भी नवाजा गया है। शिक्षक मुकुटमणि तिवारी ने बताया कि 2011 तक वे बिल्कुल स्वस्थ थे। इसी बीच उन्हें आंखों में समस्या महसूस हुई और कुछ दिनों के भीतर ही आंखों की करीब 80-90 प्रतिशत रोशनी चली गई। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि उनकी आंखें अब ठीक नहीं हो सकती। आंखों से देख नहीं पाने के कारण शुरुआत में उन्हें स्कूल जाने व पढ़ाने में समस्या हुई, लेकिन उन्होंने पढ़ाना नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि वे बालवाड़ी के साथ पहली व द...