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भारत नर्क है या स्वर्ग है

संपादक-गणेश केवंट  • भारत में हर वर्ष लाखों मासूम बच्चियों एवं कन्याओं से दुष्कर्म होता है। • देश में कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण गलियों में चलना मुश्किल हो गया है एवं रात को कुत्तों के जोर-जोर से भोंकने के कारंण शांति के साथ सोना भी मुश्किल हो गया है। • देश में लावारिस गाय बैलों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण सड़कों में गाड़ी से चलना भी बहुंत मुश्किल हो गया है लावारिस गाय बैलों के कारण भारी संख्या में दुर्घटना हो रहा है। • शराब एवं अन्य नशा के कारंण हैण देश में अपराधियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रहा है। शराबी लोग नशे में गाड़ी चलाते हुए लोगों को चोंट पहुंचाते रहते हैं थोड़ा सा टोकने पर मर्डर कर देते हैं। नशेड़ी लोग मनोरंजन के लिए चाकूबाजी कर रहे हैं।  • भारत की अपराध भ्रष्टाचार एवं प्रदूषंण से परेशान होकर देश के हजारों इमानदार व्यापारी हर वर्ष देश छोड़ने के लिये मजबूर हैं। • भारत में अंधविश्वास बहुंत ज्यादा है लोगों को जादू टोना के नाम से जिंदा जला देते हैं।

आत्मानंद अंग्रेजी मिडियम में पढ़ने वाले बच्चे भी बेरोजगार, शराबी एवं बुद्धू बनेंगे...

  आत्मानंद अंग्रेजी मिडियम में पढ़ने वाले बच्चे भी बेरोजगार, शराबी एवं बुद्धू बनेंगे क्योंकि जनसंख्या के एक प्रतिशत लोगों के लिये ही शासकीय नौकरी का स्थान रहता है। 99 प्रतिशत छात्रों को शासकीय नौकरी नहीं मिल सकता। बुद्धिजीवी बनाने वाला शिक्षा पद्धति नहीं होने के कारण लगभग 80 प्रतिशत छात्र शराबी, बुद्धू तथा मूर्ख बनेंगे और समस्याओं एवं बिमारियों के उपाय खोजने ढोंगी बाबाओं के पास जाएंगे। स्कूल काॅलेजों में जब तक संत कबीर एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जैसे इंटरनेशनल दार्शनिकों के सिद्धांतों तथा विचारों को प्रमुखता के साथ नहीं पढ़ाएंगे तब तक काॅलेज पढ़ने वाले छात्र भी शराबी एवं बुद्धू बनते रहेंगे। इंटरनेशनल दार्शनिकों के सिद्धांतों एवं विचारों को पढ़कर समझने वाला व्यक्ति ही बुद्धिजीवी बनता है और बुद्धिजीवी व्यक्ति शराबी नहीं बनता तथा रोजगार की भी व्यवस्था कर लेता है। संपादक-गणेश केंवट, रायपुर

75 प्रतिशत जनता जिसको पसंद नहीं करती वह व्यक्ति भारत का प्रधानमंत्री बनता है और देश को महंगाई एवं दारु से बर्बाद करता है

 

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा तथा श्रम अधिकारियों द्वारा 75 प्रतिशत मामलों में कार्यवाही नहीं

रायपुर/ छ.ग. में लगभग 5 लाख ट्रक-ट्रैक्टर एवं बस हैं जिसका मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम के तहत् पंजीयन होना आवश्यक है। इन सभी वाहनों का सहायक श्रमायुक्तों ने परिवहन विभाग से जानकारी लेकर पंजीयन नहीं किया जिसके कारण श्रम विभाग को हर साल करोड़ों रूपए के पंजीयन शुल्क का नुकसान होता है पिछले वर्ष 2022 में भी सभी वाहनों का पंजीयन नहीं करने के कारण शासन को करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ है। पंजीयन नहीं करने वाले लापरवाह श्रम अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। उपादान भुगतान अधिनियम के तहत् छ.ग. के सहायक श्रमायुक्त कार्यालयों को हर साल लगभग एक हजार शिकायत मिलता है इन सभी शिकायत प्रकरणों को श्रम न्यायालय में प्रस्तुत करना आवश्यक है लेकिन नहीं किया जाता जो कि गलत है, पिछले वर्ष सन् 2022 में भी उपादान भुगतान अधिनियम से सम्बन्धित सभी शिकायतों में प्रकरण बनाकर श्रम न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। श्रम न्यायालय में प्रकरण बनाकर प्रस्तुत नही करने वाले लापरवाह श्रम अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।  शासकीय निर्माण कार्य करने वाले कार्यपालन अभियंताओं एवं ठेकेदारों को मज...

अधिकतर कलेक्टर एक साल के काम को 5 साल में भी नहीं करते, जनता परेशान

रायपुर/ छ.ग. के अधिकतर कलेक्टर न्यायालयों में पांच वर्ष एवं दो वर्ष से जनता के हजारों राजस्व एवं अन्य मामले लंबित हैं। छ.ग. के तहसील न्यायालयों एवं एसडीएम न्यायालयों में भी पांच वर्ष एवं दो वर्ष से जनता के लाखों मामले लंबित हैं। कलेक्टर न्यायालयों एवं तहसील न्यायालयों में जनता के मामलों को एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखना बहुत बड़ी लापरवाही है। जनता के कामों में लापरवाही बरतकर जनता को परेशान करने वाले कलेक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना आवश्यक है। जनता का काम समय पर नहीं करने वाले छ.ग. के कलेक्टरों एवं तहसीलदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाना आवश्यक है। छ.ग. के अधिकतर कलेक्टरों की लापरवाही के कारण छ.ग. में नकली एवं अमानक खाद के प्रकरण बढ़ते जा रहे हैं छ.ग. में तीन साल के अन्दर लगभग 600 छःसौ प्रकरण सामने आए हैं। अमानक खाद वालों के खिलाफ में कृषि अधिकारियों द्वारा पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं करवाने के कारण ही किसानों के साथ धोखाधड़ी बढ़ता जा रहा है।  छ.ग. के कलेक्टरों एवं खनिज अधिकारियों की लापरवाही तथा मनमानी के कारण रेत डबल कीमत में बिकता है। अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन बढ़ता जा रह...

डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के पसंदीदा बौद्ध धर्म को दुनिया के लगभग 200 करोड़ लोग मानते हैं

बौद्ध धर्म वाले देशों में सुख-शांति समृद्धि बहुत ज्यादा है। डाॅ. अम्बेडकर के सिद्धांतों एवं विचारों से प्रभावित होकर भारत के लोग भी भारी संख्या में नास्तिक बन रहे हैं एवं बौद्ध धर्म भी स्वीकार कर रहे हैं। महान दार्शनिक एवं समाज सुधारक डाॅ. अम्बेडकर के सिद्धांतों पर चलने वाले लोगों का कहना है कि 20 साल के अन्दर भारत के लगभग 75 प्रतिशत लोग नास्तिक बन जायेंगे और बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेंगे। संपादक - गणेश केंवट, रायपुर 7987427500

विद्यार्थियों को बुद्धिमान बनने के लिए पड़ना चाहिए या बुद्धू अधिकारी और शराबी बनने के लिए?

 

भारत का विनाश हो रहा है या विकास हो रहा है ?

  भारत की जनता महंगाई एवं शराब के कारण बर्बाद हो रही है। हर वर्ष लगभग दो करोड़ से अधिक गरीबों की संख्या देश में बढ़ जाता है। गरीबों की संख्या बढ़ना देश का विनाश है या देश का विकास है। जनता को महंगाई एवं दारू से गरीब तथा भिखारी बनाकर उनको मुफ्त में राशन एवं अन्य सामान बांटने पर देश का विनाश होगा या विकास होगा?

जनता की बर्बादी से देश विकसित नहीं बनता

संतकबीर या अम्बेडकर के सिद्धांत में चलने वाले बुद्धीमान व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने पर ही भारत विकसित देश बनेगा क्योंकि छुआछूत, जात-पात, ऊंच-नीच, झाड़फूंक एवं तंत्र-मंत्र वाले बकवास धर्मों को मानने वाले नेता बड़े वाले महामूर्ख होते हैं, ये मूर्ख नेता देश को महंगाई एवं दारू से बर्बाद करते हैं तथा देश की जनता को दारू के माध्यम से अपराध बढ़ाकर परेशान भी करते हैं। भारत के बढ़ते अपराध एवं प्रदूषण से परेशान होकर हर वर्ष लाखों की संख्या में करोड़पति भारत छोड़ने को मजबूर हैं। वर्तमान में भारत की जनता महंगाई एवं दारू के कारण बर्बाद हो रही है। जनता की बर्बादी से देश विकसित नहीं हो सकता।

छ.ग. के मुख्यमंत्री को दारू के लिये क्या कहा जाए ?

छ.ग. में प्रतिवर्ष भारी संख्या में लोग दारू की बिमारी एवं दारू के कारण होने वाले झगड़ों से बर्बाद हो जाते हैं इसके लिये छ.ग. के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी को क्या कहा जाए ? छ.ग. में दारू एवं अन्य नशे के कारण बहुत ज्यादा अपराध हो रहे हैं। छ.ग. के कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि छ.ग. के एक बड़े कांग्रेसी नेता ने शराबबंदी के लिये हाथ में गंगाजल रख कर कसम खाया था।

प्रधानमंत्री नोटबंदी जैसा पूरे देश में दारूबंदी कर सकते हैं या नहीं ?

भारत में प्रति वर्ष करोड़ों लोग दारू की बिमारी एवं दारू से होने वाले झगड़ों से बर्बाद हो जाते हैं। लाखों परिवार दारू के कारण ही टूट जाते हैं। प्रधानमंत्री को नोटबंदी जैसा पूरे देश में दारूबंदी करना चाहिए या नहीं।