अगर सवाल किया जाए कि इस दुनिया का सबसे अनमोल सुख क्या है, तो सबके अलग-अलग जवाब हो सकते हैं। कोई कहेगा अच्छा खाना, कोई अच्छी ड्रिंक बताएगा, कोई सेक्स, तो कोई नींद कहेगा…। सभी चीजों पर गौर किया जाए तो असल में हमारी दुनिया में अच्छी नींद से आनंददायक कुछ नहीं हो सकता। बड़ी बात ये है कि नींद सिर्फ आनंद तक सीमित नहीं है। अच्छी नींद, अच्छी सेहत का भी राज होती है। लेकिन भारत के लोगों को अच्छी और पूरी नींद नहीं मिल पा रही है।
लोकल सर्कल्स की एक स्टडी के मुताबिक, भारत के 55% लोग ऐसे हैं, जिन्हें हेल्दी नींद नहीं मिल रही है। ये लोग या तो गहरी नींद में नहीं सो पाते या फिर 6 घंटे से कम सो पाते हैं। देश में 2.5 करोड़ लोग तो स्लीप एप्नीया से जूझ रहे हैं।
- अच्छी नींद का मतलब क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
- नींद पूरी नहीं होने से क्या नुकसान हो सकते हैं?
- लोगों को क्यों नहीं मिल पा रही हेल्दी नींद?
- जरूरी है हेल्दी और कंप्लीट नींद
आपने लोगों को कहते सुना होगा कि जब हम सोते हैं तो दूसरी दुनिया में होते हैं। असल में सोते समय हम अचेतन अवस्था में चले जाते हैं। अपने आसपास की दुनिया से एकदम बेखबर, कई बार सपनों की दुनिया में खोए हुए।
इस समय हमारे शरीर और दिमाग के काम करने का तरीका बिल्कुल बदल जाता है। पूरा शरीर फटाफट अपनी खामियों की लिस्ट बनाता है और उनकी मरम्मत शुरू कर देता है। इस दौरान जो कुछ भी बिगड़ा हुआ होता है, उसे सुधार लिया जाता है, संभावित खतरे आकलन कर उनसे लड़ने की तैयारी होती है। एक अच्छी नींद के बाद हमारे गट बैक्टीरिया की ताकत कई गुना बढ़ जाती है। अगर डॉक्टर बीमार व्यक्ति आराम की सलाह देते हैं, तो उसके पीछे यही वजह होती है।
समझौता अपनी नींद के साथ
आजकल भागदौड़ वाली जिंदगी में हमने सबसे ज्यादा समझौता अपनी नींद के साथ किया है। नींद का कोई तय समय नहीं, पूरी दिनचर्या ही बिगड़ी हुई है। पहले नींद न आना बड़ी उम्र के लोगों की समस्या थी, अब टीन-एज में ही यह समस्या शुरू हो जाती है।
नींद की कमी बन रही महामारी
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के न्यूरोसाइंटिस्ट मैथ्यू वॉकर ने नींद पर 'व्हाए वी स्लीप' नाम की किताब लिखी। इसमें वह लिखते हैं कि हम नींद की कमी वाली भयावह महामारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने इसे मौजूदा सदी की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया है। उन्होंने लिखा है कि जलवायु परिवर्तन, मोटापा और स्वच्छ पानी तक पहुंच तीन बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे हैं। इस लिस्ट में चौथे नंबर पर नींद जुड़ सकती है, जो सबके लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
नींद से समझौता
प्रकृति ने हमें नींद के रूप में बड़ा वरदान दिया है। यह हमारे मन और तन को अगले दिन की चुनौतियों से लड़ने और जिंदगी का भरपूर आनंद लेने के लिए तैयार करती है। ये हमारे शरीर के भीतरी अंगों को आराम देकर उन्हें दुरुस्त बनाती है।
लेकिन अधिकतर लोग अनजाने में नींद से समझौता कर लेते हैं। इससे काम के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त तो मिल जाता है। इसके बदले ढेरों बीमारियों के लिए बुलावे के लिए लिस्ट भी बन रही होती है।
मानसिक तनाव बढ़ाता है कम नींद
भरपूर नींद नहीं लेने से मानसिक तनाव बढ़ता है। यह लोगों के भीतर गुस्सा और चिड़चिड़ापन भर देता है। ऐसे लोग स्वभाव से आक्रामक हो जाते हैं। यह धीरे-धीरे दिमाग को नुकसान पहुंचाता रहता है और अल्जाइमर जैसी घातक बीमारी की वजह बन जाता है।
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
अच्छी नींद के लिए दिनचर्या में बदलाव करना जरूरी होता है। हमें अपने सोने-जागने का ठीक समय तय करना होगा।
- इलेक्ट्रिक गैजेट्स के साथ कम से कम समय बिताएं।
- सुबह-शाम कुछ देर खुली हवा में टहलना चाहिए।
- यार-दोस्तों से बातचीत करिए, मन की बातें शेयर करें।
- हल्की-फुल्की यानी मॉडरेट एक्सरसाइज करिए।
- शराब-सिगरेट या किसी भी नशे से दूरी बनाएं।
- सोने से एक घंटे पहले शॉवर लेना फायदेमंद है।
- चाय या कॉफी ज्यादा न पिएं।
- रात का खाना बिस्तर में जाने से 2 घंटे पहले खाएं।
- बेड पर जाने से पहले मोबाइल और दूसरे गैजेट्स दूर रख दें।
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