क्यों बनते हैं वोकल नोड्यूल्स, हो सकता है बीमारी का संकेत, बरतें सावधानी
पृथ्वी पर अरबों प्रजाति के छोटे-बड़े जीव रहते हैं। लेकिन उनमें कुछ ही जीव ऐसे हैं, जिनके पास भाषा है। जो मुंह से बोलकर अपने विचार और भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं।
इन सभी जीवों में मनुष्य सबसे यूनिक है। मनुष्य की बोली सबसे खास है क्योंकि हमारे पास न सिर्फ आवाज बल्कि लिपि भी है। इसके सहारे ही तो हम बोलकर और लिखकर एक-दूसरे के दुख-दर्द और राजी-खुशी कह-सुन पाते हैं। भाषा ही हमें एक-दूसरे के करीब ले जाती है।
फर्ज कीजिए कि एक दिन प्रकृति इसी बोली को हमसे छीन ले तो इस गूंगे संसार में हम कैसे रह पाएंगे। प्रकृति ने हमें यह नायाब तोहफा दिया है, लेकिन कई बार अपनी गलत आदतों और गलत लाइफ स्टाइल के चलते हम इस नायाब तोहफे के साथ खिलवाड़ करते हैं। खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान हमारी आवाज को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यही कारण है कि गले और आवाज से जुड़ी बीमारियों में भी इजाफा हो रहा है।
आज हम बात करेंगे वोकल कॉर्ड के बारे में। साथ ही जानेंगे कि-
• क्या आवाज में बदलाव किसी बीमारी का लक्षण है?
• किस तरह के खानपान से आवाज खराब हो सकती है?
एक्सपर्ट: डॉ. शमा कोवळे, ENT सर्जन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल (मुंबई)
अगर आपकी आवाज कुछ समय से भारी हो गई है या शुरू में ठीक रहती है, लेकिन कुछ देर बोलने के बाद बदल जाती है तो ऐसे में आपके वोकल कॉर्ड पर दाने या वोकल नोड्यूल्स हो सकते हैं।
सवाल- वोकल कॉर्ड क्या होते हैं?
जवाब - वोकल कॉर्ड हमारे वॉइस बॉक्स का हिस्सा होते हैं। ये सांस की नली के ऊपर होते हैं। जब हम चुप रहते हैं तो वोकल कॉर्ड खुले रहते हैं, जिससे सांस अंदर-बाहर आती-जाती है।
लेकिन जब हम बोलते हैं तो वोकल कॉर्ड एक दूसरे से मिल जाते हैं। ऐसे में जब फेफड़ों से आने वाली हवा बंद वोकल कॉर्ड से गुजरती है तो इसमें कंपन होता है। वोकल कॉर्ड के इसी कंपन से आवाज पैदा होती है।
सवाल- वोकल नोड्यूल्स कैसे बनते हैं?
जवाब - आमतौर पर बोलते समय दोनों वोकल कॉर्ड एक दूसरे से मिलते हैं। लेकिन जब लंबे समय तक ऊंची आवाज में बोला, चिल्लाया या कुछ गाया जाए तो वोकल कॉर्ड की सतह पर घर्षण होता है। इससे शुरूआत में वोकल कॉर्ड पर सूजन आती है, लेकिन आवाज में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलता। लेकिन ज्यादा देर तक तेज बोलने पर आवाज बैठने लगती है। अगर समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए और सावधानी नहीं बरती जाए तो वोकल कॉर्ड पर दाने बनने लगते हैं, जिन्हें 'वोकल नोड्यूल्स' कहते हैं। वोकल नोड्यूल्स की वजह से ही आवाज में बदलाव होता है।
वोकल नोड्यूल्स की परेशानी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन सिंगर, पब्लिक स्पीकर, टीवी एंकर, पॉलिटिशियन, वकील या टीचर जैसे प्रोफेशन से जुड़े लोगों में यह ज्यादा देखी जाती है।
सवाल- किस तरह के खानपान से आवाज खराब हो सकती है?
जवाब- डॉ. शमा कोवळे बताती हैं कि हमारा खानपान सीधे तौर पर आवाज को प्रभावित नहीं करता है। लेकिन बहुत ज्यादा तीखा या ऑयली खाने से एसिडिटी होने का खतरा रहता है। एसिडिटी का असर आवाज पर हो सकता है। इसके अलावा कम पानी पीने, एल्कोहल या कैफीन की वजह से भी आवाज में बदलाव हो सकता है।
नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए।
सवाल- क्या आवाज में बदलाव किसी बीमारी का लक्षण हो सकता है?
जवाब- डॉ. शमा कोवळे बताती हैं कि किसी बीमारी के पहले आवाज में बदलाव नहीं आता है। बल्कि आवाज में बदलाव होना किसी बीमारी का संकेत जरूर हो सकता है। जैसेकि-
• न्यूरोलॉजिकल कंडीशन की वजह से आवाज में बदलाव आ सकता है।
• लेरिन्जाइटिस की वजह से वॉयस बॉक्स में सूजन आ जाती है, जिससे आवाज बदल सकती है।
• वॉइस बॉक्स कैंसर या लैरिंजियल कैंसर की वजह से आवाज में बदलाव हो सकता है।
• थायराइड सर्जरी के बाद आवाज में बदलाव आ जाता है।
• सर्जिकल ट्रॉमा की वजह से आवाज में बदलाव आ सकता है।
आवाज में बदलाव आने को लोग सामान्य बात मानते हैं, जबकि यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। अगर किसी की आवाज 7 दिनों से ज्यादा खराब है तो इसकी जांच जरूर करानी चाहिए।
सवाल- आवाज खराब न हो, इसके लिए किस तरह का भोजन करना चाहिए?
जवाब- अक्सर वायरल संक्रमण से गले में खराश या आवाज में बदलाव आता है। ऐसे में हर्बल चाय, शहद, अदरक, लहसुन, लौंग या काली मिर्च जैसी चीजें फायदेमंद हो सकती हैं। इसके अलावा सुबह नमक के पानी से गरारे करना बेहतर विकल्प है। गले में खराश होने पर दूध, दही, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों से परहेज करना चाहिए। साथ ही खट्टी चीजों से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
सवाल- आवाज को सही रखने के लिए किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब - आवाज को सही रखने के लिए इन टिप्स को अपना सकते हैं। जैसेकि-
• अगर आप लंबे समय तक भाषण दे रहे हैं या किसी मीटिंग में बोल रहे हैं तो बीच-बीच में पानी पीते रहें, जिससे गला हाइड्रेटेड बना रहे।
• अगर किसी सभा या मीटिंग में बहुत सारे लोगों को एक साथ संबोधित करना है तो माइक का इस्तेमाल करें।
• आवाज को दुरुस्त रखने के लिए प्राणायाम या ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
• अगर आप किसी ऐसी जगह हैं, जहां बहुत तेज म्यूजिक या नॉइस है तो तेज बोलने का प्रयास बिल्कुल न करें।
• धुएं से पूरी तरह से दूरी बनाएं क्योंकि धुएं में ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो वॉइस बॉक्स को ड्राई कर देते हैं।




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