आत्मानंद अंग्रेजी मिडियम में पढ़ने वाले बच्चे भी बेरोजगार, शराबी एवं बुद्धू बनेंगे क्योंकि जनसंख्या के एक प्रतिशत लोगों के लिये ही शासकीय नौकरी का स्थान रहता है। 99 प्रतिशत छात्रों को शासकीय नौकरी नहीं मिल सकता। बुद्धिजीवी बनाने वाला शिक्षा पद्धति नहीं होने के कारण लगभग 80 प्रतिशत छात्र शराबी, बुद्धू तथा मूर्ख बनेंगे और समस्याओं एवं बिमारियों के उपाय खोजने ढोंगी बाबाओं के पास जाएंगे।
स्कूल काॅलेजों में जब तक संत कबीर एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जैसे इंटरनेशनल दार्शनिकों के सिद्धांतों तथा विचारों को प्रमुखता के साथ नहीं पढ़ाएंगे तब तक काॅलेज पढ़ने वाले छात्र भी शराबी एवं बुद्धू बनते रहेंगे। इंटरनेशनल दार्शनिकों के सिद्धांतों एवं विचारों को पढ़कर समझने वाला व्यक्ति ही बुद्धिजीवी बनता है और बुद्धिजीवी व्यक्ति शराबी नहीं बनता तथा रोजगार की भी व्यवस्था कर लेता है।
संपादक-गणेश केंवट, रायपुर

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