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औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा तथा श्रम अधिकारियों द्वारा 75 प्रतिशत मामलों में कार्यवाही नहीं

रायपुर/ छ.ग. में लगभग 5 लाख ट्रक-ट्रैक्टर एवं बस हैं जिसका मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम के तहत् पंजीयन होना आवश्यक है। इन सभी वाहनों का सहायक श्रमायुक्तों ने परिवहन विभाग से जानकारी लेकर पंजीयन नहीं किया जिसके कारण श्रम विभाग को हर साल करोड़ों रूपए के पंजीयन शुल्क का नुकसान होता है पिछले वर्ष 2022 में भी सभी वाहनों का पंजीयन नहीं करने के कारण शासन को करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ है। पंजीयन नहीं करने वाले लापरवाह श्रम अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।

उपादान भुगतान अधिनियम के तहत् छ.ग. के सहायक श्रमायुक्त कार्यालयों को हर साल लगभग एक हजार शिकायत मिलता है इन सभी शिकायत प्रकरणों को श्रम न्यायालय में प्रस्तुत करना आवश्यक है लेकिन नहीं किया जाता जो कि गलत है, पिछले वर्ष सन् 2022 में भी उपादान भुगतान अधिनियम से सम्बन्धित सभी शिकायतों में प्रकरण बनाकर श्रम न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। श्रम न्यायालय में प्रकरण बनाकर प्रस्तुत नही करने वाले लापरवाह श्रम अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। 

शासकीय निर्माण कार्य करने वाले कार्यपालन अभियंताओं एवं ठेकेदारों को मजदूरों से सम्बन्धित मंथली एवं वार्षिक जानकारी श्रम विभाग में देना आवश्यक है इन नियम का भी पालन नहीं हो रहा है नियम का पालन नहीं करने वाले कार्यपालन अभियंताओं के खिलाफ श्रम अधिकारियों को कार्रवाई करना चाहिए लेकिन नहीं किया जा रहा है।

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा कारखानों का जो सामान्य निरीक्षण किया जाता है उसमें लगभग 95 प्रतिशत कारखानों में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सम्बन्धि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है जिसमें सभी को नोटिस भी जारी होता है लेकिन नोटिस के बाद कार्रवाई लगभग 25 प्रतिशत कारखानों के ही खिलाफ होता है बाकि 75 प्रतिशत कारखानों को गलत ढंग से छोड़ दिया जाता है। दस साल एवं पांच साल वाले पुराने कारखानों को नोटिस देकर छोड़ देना बहुत ही गलत है। कारखानों को नोटिस देकर छोड़ देने के कारण ही कारखानों की लापरवाही एवं मानमानी बढ़ता जा रहा हैं जिसके कारण हर साल छ.ग. में सैकड़ों औद्योगिक दुर्घटना हो रहा है जिसमें मजदूर लोग बेमौत मर रहे हैं। पिछले वर्ष भी छ.ग. के 911 कारखानों का सामान्य निरीक्षण किया गया था जिसमें मात्र 214 कारखानों के खिलाफ ही मामला बनाया गया बाकि को गलत ढंग से छोड़ दिया गया। नोटिस के बाद मामला बनाकर न्यायालय में प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।

औद्योगिक दुर्घटनाओं में मजदूरों के मौत वाले प्रकरण में भी दोषी लोगों को जेल की सजा नहीं मिल रहा है जो कि उचित नहीं है। छोटे न्यायालयों द्वारा मौत के मामले में छोटा सा जुर्माना होने पर जेल की सजा दिलवाने हेतु बड़े न्यायालयों में अपील होना आवश्यक है।  दोषी कारखानों के खिलाफ मामला नहीं बनाने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किया जाए। 

इस प्रकरण का शिकायत एक साल पहले श्रमायुक्त कार्यालय में किया गया था जिसमें लापरवाह श्रम अधिकारियों के खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं किया गया है। श्रमायुक्त कार्यालय के जांचकर्ता अधिकारी भी बहुत लापरवाह हैं। औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम 1961 के तहत् कारखानों का जांच श्रम अधिकारियों द्वारा नहीं किया जा रहा है, इस अधिनियम के तहत् जांच हेतु श्रम अधिकारियों को आदेश दिया जाना आवश्यक है।

इस प्रकरण का शिकायत श्रम मंत्री एवं श्रम सचिव को किया गया है.


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