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पीडब्ल्यूडी सफाई ठेका में घोटाला

पीडब्ल्यूडी में सफाई के ठेके पर अफसरों की मनमानी जारी है। सफाई के ठेके की अवधि दो साल पहले समाप्त हो चुकी थी, लेकिन इसके तीन साल बाद टेंडर तो लगाया गया, पर उसे ओपन नहीं किया गया। उल्टे ठेकेदार का समय बढ़ाते रहे। इस बात की जानकारी उच्च अधिकारियों को लगी, तो उन्होंने चर्चा के लिए बुलाया। बताया जा रहा है कि टेंडर में मनमाने ढंग से ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तें जोड़ी गईं।

हाईकोर्ट में सफाई का ठेका पीडब्ल्यूडी के माध्यम से होता है। वर्तमान टेंडर मार्च 2023 में समाप्त हो चुका है और इसका काम सतीष कुमार सिंह कर रहे हैं। नियमानुसार टेंडर समाप्त होने के बाद नया टेंडर लग जाना था। पहला टेंडर 4 जुलाई 2023 को लगाया गया था, जिसे 6 जुलाई 2023 को ओपन होना था, लेकिन ओपन नहीं किया गया। दूसरा टेंडर 29 सितंबर 2023 को लगाया गया था, जिसे 4 अक्टूबर 2023 को ओपन होना था, लेकिन इसे भी ओपन नहीं किया गया। तीसरी बार टेंडर 16 फरवरी 2024 को लगाया गया, जिसे 20 फरवरी 2024 को ओपन होना था, लेकिन यह भी ओपन नहीं हुआ।

अधिकतम दर और ठेकेदार पर मेहरबानी

यह टेंडर 1.462 फीसदी अधिकतम दर पर लगाया गया। बता दें कि यह टेंडर इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें हर साल खर्च होने वाली राशि में 10% की वृद्धि होती है। पांच साल में कुल बढ़ोतरी लगभग 50 फीसदी हो चुकी है। टेंडर जानबूझकर लटकाया गया और विशेष शर्तें लगाई गईं ताकि अन्य कोई फर्म इसमें शामिल न हो सके। वर्तमान टेंडर तय दर से अधिकतम दर पर है। यदि टेंडर समय पर होता, तो यह न्यूनतम दर पर लग सकता था, जिससे शासन की बचत होती।

उच्च अधिकारियों ने बुलाया तो भी नहीं गए

पीडब्ल्यूडी के एसई केपी संत को विभाग के सीई ने इस संबंध में चर्चा के लिए रायपुर बुलाया, लेकिन वे नहीं गए। ईएनसी कार्यालय से मुख्य अभियंता के पत्र/ज्ञापन क्रमांक 2803/48098/प्र.अ./नि.प्र./25-26 में लिखा गया है कि संदर्भित पत्र का अवलोकन करें और संशोधित बिड डाक्यूमेंट अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसके संबंध में स्पष्ट अभिमत/प्रतिवेदन सहित दिनांक 1.11.25 को कार्यालय में उपस्थित होना सुनिश्चित करें।

ईएनसी के पास टेंडर लगाने अधिकार

टेंडर तीन बार लगाए जाने के बाद ओपन नहीं हुआ, यह ईई के विशेष शर्तों और अतिरिक्त आइटम (फेसिलिटी मैनेजमेंट, एंटी टरमाइट और अन्य) शामिल करने के कारण है। 1.99 करोड़ रुपए के टेंडर में 51 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि जुड़ने से यह दो करोड़ रुपए से अधिक का हो गया, जिसे लगाने का अधिकार ईएनसी को है। संबंधित डिवीजन के ईई के जब विशेष शर्तों के साथ टेंडर लगाने की जानकारी मिली, तब निर्देश दिया गया कि यह अधिकार शासन का है। मेरे जाने का सवाल नहीं, टेंडर लगाने वाले को चर्चा के लिए जाना चाहिए। मैं किसी भी समय जाने को तैयार हूं।

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