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पीडब्ल्यूडी के भ्रष्ट्र अधिकारी मजे कर रहे हैं

निर्माण विभागों में पीडब्ल्यूडी एक ऐसा विभाग है जहां तमाम सीनियर अफसर भ्रष्टाचार की जांच के घेरे में हैं। और तो और 15 इंजीनियर विभागीय जांच में दोषी भी पाए गए हैं। यही नहीं, 53 अफसरों के खिलाफ तो ईओडब्ल्यू-एसीबी में केस दर्ज हैं। इनमें से कई तो रिटायर भी हो गए हैं।

प्रदेश में पीडब्ल्यूडी का सालाना बजट करीब 6 हजार करोड़ से अधिक है। चुनावी साल में सडक़ से लेकर ब्रिज का निर्माण तेजी से चल रहा है। इन सबके बीच निर्माण से जुड़े तमाम बड़े अफसरों के खिलाफ अलग-अलग तरह की जांच चल रही है। हाल यह है कि कई अफसर तो रिटायर हो गए हैं, लेकिन ईओडब्ल्यू-एसीबी में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की पड़ताल हो रही है।

बताया गया कि दो पूर्व ईएनसी जीएस सोलंकी, और पीएस क्षत्रिय के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी में केस दर्ज है। उनके खिलाफ जांच अभी भी खत्म नहीं हुई है। यही नहीं, मौजूदा ईएनसी केके पिपरी, और उनके पूर्ववर्ती प्रभारी ईएनसी वीके भ्रतपहरी के खिलाफ भी ईओडब्ल्यू-एसीबी में केस दर्ज है। कुल मिलाकर 53 इंजीनियरों के खिलाफ अकेले ईओडब्ल्यू-एसीबी में केस दर्ज है।

दूसरी तरफ, पीडब्ल्यूडी के 36 अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में विभागीय जांच चल रही है। इनमें से 15 अफसरों के खिलाफ तो विभागीय जांच प्रमाणित भी हो चुकी है। भण्डार क्रय नियम का उल्लंघन करने, और एस्कलेशन भुगतान में अनियमितता पर कार्यपालन यंत्री बीआर ठाकुर, नरेश स्वामी, और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरपी गौर के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित हुए हैं। इनमें नरेश स्वामी 28 लाख की वसूली उनके वेतन से करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही साथ दो वेतन रोकने के आदेश के बाद विभागीय जांच प्रकरण समाप्त करने के आदेश दिए गए हैं।

इसी तरह बीआर ठाकुर से रामानुजगंज में खरीदी गई सामग्री में अनियमितता के मामले में 56 लाख 75 हजार रूपए वसूलने के आदेश दिए गए हैं। दो वेतन वृद्धि भी रोकी गई। इसी तरह आरपी गौर से 20 लाख की वसूली के आदेश वेतन से करने के दिए गए। इसी तरह उपयंत्री एमएलसी से 2 लाख 90 हजार रूपए की वसूली रेहण्ड नदी में सेतु निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप पर की गई है।

विभागीय जांच में दोषी पाए गए अफसरों में एके जोशी सहायक अभियंता, रणबीर बेक एसडीओ, आरपी कुम्हारे तत्कालीन कार्यपालन अभियंता, आरएन पाल एसडीओ, पीएस मरकाम, पीएस चंदेल कार्यपालन अभियंता, एसडीओ टीएल ठाकुर, प्रभारी कार्यपालन अभियंता बीआर ठाकुर, नरेश स्वामी कार्यपालन अभियंता, आरपी गौर प्रभारी कार्यपालन अभियंता, वीके बेदिया कार्यपालन यंत्री, एमएल सिंह उपअभियंता, मोहन राम भगत एसडीओ सराईपाली, संजय सूर्यवंशी कार्यपालन यंत्री, आरके वर्मा तत्कालीन एसडीओ हैं।

जिन अफसरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी में भ्रष्टाचार के प्रकरणों की जांच चल रही है, उनमें तीन पूर्व प्रमुख अभियंता से लेकर मौजूदा प्रमुख अभियंता, और जीएस सोलंकी प्रमुख अभियंता, पीएस क्षत्रिय प्रमुख अभियंता, सुरेश शर्मा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, अशोक खंडेलवाल कार्यपालन यंत्री, एसएस गड़ेवाल, एके निगम दोनों सहायक यंत्री, बीआर ठाकुर कार्यपालन यंत्री, एन खुंटे, आरएस राम एसडीओ, आरएस कोगे उपअभियंता, आर के गोयल तत्कालीन मुख्य अभियंता, सीएस त्रिवेदी तत्कालीन परियोजना संचालक एडीबी, विजय कुमार भारती उपअभियंता, वायके गोपाल कार्यपालन अभियंता, पीएम कश्यप अधीक्षण अभियंता, ओपी चंदेल कार्यपालन अभियंता, सीएल सिंह एसडीओ, वेद प्रकाश एसडीओ, एसके मिश्रा एसडीओ, आरके गोयल मुख्य अभियंता, भावेश सिंह एसडीओ, निर्मल सिंह ठाकुर एसडीओ, राज किशोर उपअभियंता, आशीष नागपुरे उपअभियंता, आरके सोनवानी उपअभियंता, डीके अग्रवाल प्रोजेक्ट डायरेक्टर शामिल हैं।

इसके अलावा आरपी अग्रवाल प्रभारी कार्यपालन अभियंता, विजय लाल लेखा अधिकारी, केके पीपरी मुख्य अभियंता, अनुज मोहबिया उपअभियंता, भगतराम साहू एसडीओ रायगढ़, मनहरण लाल शर्मा कार्यपालन यंत्री, मदन मोहन श्रीवास्तव एसई, आरके गोयल सीई, एसएल सिंह कार्यपालन यंत्री, वेद प्रकाश पांडेय एसडीओ, विजय कुमार भत प्रहरी प्रमुख अभियंता, लक्ष्मीनारायण राठौर सहायक अभियंता, डीके माहेश्वरी कार्यपालन अभियंता, मोचन प्रसाद कश्यप, एके मंधान मुख्य अभियंता, राम मोहन दुबे उपअभियंता, महेश्वर प्रसाद कार्यपालन अभियंता, राम सजीवन चौरसिया एसडीओ, एके यादव तत्कालीन उप महाप्रबंधक, सुभाषचंद्र आर्या उपमहाप्रबंधक, रूबेन केरकेटा, खुटे एई, अजय कुमार टेम्भूने, सुशील कुमार उडकुरे एसडीओ, डी राम कार्यपालन अभियंता, विकास श्रीवास्तव कार्यपालन अभियंता, प्रभात सक्सेना, और परियोजना निदेशक कोरी हैं।




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