• पशुपालन विभाग में भर्ती का मामला, अदालत ने छह महीने में जांच कर कार्रवाई करने दिया था आदेश
पशुपालन विभाग में 2012 में हुए भर्ती घोटाले में न तो दोषियों को दंड मिल सका है और न ही अपात्रों पर कोई कार्रवाई हुई। हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को आदेश में कहा था कि छह महीने में जांच कर कार्रवाई की जाए। अब जिला प्रशासन ने समय सीमा पार कर दी है। पशुपालन विभाग में हुई भर्ती की दोबारा जांच शुरू की गई थी। 2012 में स्वच्छकर्ता/ परिचारक सह चौकीदार के 32 पदों पर नियुक्ति होनी थी लेकिन तत्कालीन उप संचालक डॉ. एसडी द्विवेदी ने मनमानी करके लिखित परीक्षा लेने का प्रावधान जोड़ दिया।
परीक्षा के बाद 32 के बजाय 42 को ज्वाइनिंग लेटर दे दिए गए, तब एक आवेदक आनंद विकास मेहरा ने नियुक्ति में अनियमितता की शिकायत कलेक्टर रायगढ़ से की। कलेक्टर ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे। जांच में पूरी गड़बड़ी सामने आ गई। आंसर शीट में कई आवेदकों को नंबर बढ़ाकर दिए गए। 27 सितंबर 2012 को कलेक्टर ने नियुक्ति को निरस्त कर दिया। चार डॉक्टरों को सस्पेंड किया गया था। इनके विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इसके खिलाफ 44 लोगों ने अपील की थी। अदालत ने 15 फरवरी 2024 को अंतिम फैसला देते हुए कहा कि मामले की एक बार फिर से जांच कराई जाए। जिसकी नियुक्ति गलत तरीके से की गई है, उसे सेवा से हटाया जाए। इस मामले में पूर्व उप संचालक डॉ. एसडी द्विवेदी रिटायरमेंट के दिन ही सस्पेंड हुए थे।
चयन समिति के सदस्य डॉ. पीपी श्रीवास्तव, डॉ. शत्रुघ्न सिंह, डॉ. तृप्ति सिंह और डॉ. हितेंद्र कुमार सोनी भी एफआईआर दर्ज होते ही सस्पेंड हो गए थे। अदालत ने छह महीने की मोहलत दी थी जो 15 अगस्त को ही पूरी हो चुकी है। अब तो सात महीने होने जा रहे हैं। जिन लोगों ने ईमानदारी से अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी, प्रशासन उनका मजाक उड़ा रहा है। हाईकोर्ट ने इस केस में दर्ज तमाम याचिकाओं को एक साथ निराकृत किया था। राज्य की ओर से जवाब दिया गया था कि पांच सदस्यीय कमेटी 29 अगस्त 2023 को गठित कर दी गई है। इसके बाद जांच के लिए फिर से छह महीने का समय दिया गया था जो गुजर चुका है। इस वजह से पात्र आवेदकों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। अब अवमानना का केस दायर किया जा सकता है।
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