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75. 75 सदस्यों वाला दो परिवार दुर्ग में खुशी से हैं

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस...75 सदस्यों वाले दो संयुक्त परिवारों की कहानी: दुर्ग की पटेल और भिलाई की देवांगन फैमिली में हर दिन उत्सव जैसा माहौल

आज 15 मई को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर हम दुर्ग जिले के ऐसे दो संयुक्त परिवारों से मिला रहे हैं, जिनमें तीन पीढ़ियों के सदस्य सालों से एक साथ हंसी-खुशी से रह रहे हैं। राजनांदगांव जिले की सीमा पर बसे छोटे से गांव छोटे टेमरी का पटेल परिवार कहता है कि हमारे घर हर दिन त्योहार है।

इसी तरह भिलाई केइंद्रावती नगर कोहका में रहने वाला देवांगन परिवार भी संयुक्त ही है। यहां रिटायर्ड बीएसपी कर्मी के पांच बेटों का परिवार एक साथ रह रहा है। परिवार में कुल 32 सदस्य हैं।


सबसे पहले बात छोटे टेमरी के पटेल परिवार की...

एक साथ रह रहा 40 लोगों का परिवार

भिलाई से 35 किलोमीटर दूर राजनांदगांव और दुर्ग जिले की सीमा पर बसा है छोटे टेमरी गांव। यहां ग्रामीणों से पता चला कि स्व. टेंहगूराम पटेल के बेटे पिछली तीन पीढ़ी से संयुक्त परिवार में रह रहे हैं। उनके परिवार में वर्तमान में छोटे बड़े लोगों को मिलाकर कुल 40 लोग एक साथ रहते हैं।

इस छोटे से परिवार में सास-बहू और ननद एक साथ बैठकर भाजी चुनती हैं। गाना गाते हुए खाना पकाती हैं। इसके अलावा जब समय मिलता है, तो अपने पति के साथ खेत में काम करती हैं। बच्चों को खेलने के लिए बाहर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। घर में ही 8-10 बच्चे हो जाते हैं, जो एक साथ खेलते और पढ़ाई करते हैं।


62 के समय लाल ने बताई परिवार की वंशावली

पटेल परिवार के मुखिया समय लाल ने बताया कि उनके अलावा उनके छोटे भाई द्वारिका राम पटेल (58 साल) और द्वासूराम पटेल (50 साल) मुखिया के रूप में हैं। हम तीनों के पिता स्व. टेंहगूंराम पटेल थे। एक बहन सोनबाई भी साथ ही रहती है।

समय लाल की पत्नी के साथ घर में उनके तीन बेटे कमलेश (40 साल), मोरध्वज (35 साल) और गिरीश पटेल (32 साल) रहते हैं। बेटी रमशीला की शादी हो चुकी है। समय लाल का बड़ा बेटा कमलेश महासमुंद में टीचर है।

उन्होंने बताया कि कमलेश की दो बेटियां गुप्तेश्वरी (14 साल) और तनुष्का (12 साल) हैं। इसी तरह मोरध्वज की तीन बेटियां विद्या (9 साल), प्रियांशी (7 साल) और कुंजल (5 साल) हैं। छोटे बेटे गिरीश पटेल की एक बेटी कनिका (7 साल), दो बेटे विजय (9 साल) और मयंक (5 साल) हैं।

समयलाल के छोटे भाई द्वारिका पटेल का एक बेटा संजय और तीन बेटिया हैं। संजय मजदूरी करता है, उसका दो साल का एक बेटा है। वहीं, सबसे छोटे भाई द्वासु राम पटेल के दो बेटे नरोत्तम (24 साल), लुकेश्वर (21 साल) और सबसे बड़ी बेटी गीतांजलि (28 साल) की है।

संयुक्त परिवार, खुशी का आधार

पटेल परिवार का कहना है कि संयुक्त परिवार खुशी का आधार होता है। त्योहारों में मेहमान आने से घर भरा-भरा होता है। उनके घर में तो हर दिन ही त्योहार की तरह बीतता है। साथ में खाना बनाने से लेकर सोने जाने तक सारे काम वे लोग मिल बांटकर करते हैं।


भिलाई के 32 सदस्यीय देवांगन परिवार की कहानी

भिलाई के इंद्रावती नगर कोहका में बीएसपी से रिटायर हुए 80 साल के जीवन लाल देवांगन पत्नी घसनी बाई और पांच बेटों के परिवार के साथ अपने मकान मातृ छाया में संयुक्त रूप से रहते हैं। उनकी एक बेटी भी है जिसकी शादी हो चुकी है और वह ससुराल में खुश है।

जीवन लाल ने बताया कि उनके पांच बेटों के परिवार समेत 32 लोग एक साथ, एक छत के नीचे रहते हैं। बेटी मंजुलला (47 साल) अपने परिवार के साथ ससुराल में रहती हैं। उनके सबसे बड़े बेटे राम नारायण देवांगन की मौत हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे अमित (35 साल) और सुमित कुमार (25 साल) अपना खुद का बिजनेस करते हैं। वहीं, बड़े बेटे नरेंद्र कुमार देवांगन (56 साल) बीएसपी में काम करते हैं। एक बेटा अभिजीत देवांगन (32 साल) प्राइवेट नौकरी करता है।

कोई नौकरी में तो कोई चला रहा दुकान

वहीं तीसरे नंबर के बेटे हेमंत कुमार (53 साल) जूस की दुकान चलाते हैं। उनके बच्चे अंकित और निशा देवांगन हैं। हेमंत के साथ ही उनके चौथे नंबर के बेटे संजय देवांगन भी जूस की दुकान चलाते हैं। संजय के दो बेटे अनिमेश और अनिकेत हैं। दोनों प्राइवेट नौकरी करते हैं।

इसके साथ ही 5वें नंबर के बेटे संतोष देवांगन भिलाई स्टील प्लांट में नौकरी करते हैं। संतोष के दो बच्चे आयुष देवांगन और खुशी हैं। दोनों हायर एजुकेशन ले रहे हैं। वहीं, सबसे छोटे बेटे सुनील देवांगन भी जूस की दुकान चलाते हैं। उन्हे एक बेटा 22 साल का आदित्य है, जो पढ़ाई कर रहा है।

सास से लेकर बहुओं तक की सोच संयुक्त परिवार की

देवांगन परिवार में सबसे बुजुर्ग घसनिन बाई से लेकर उनकी बहुओं और नतेहुओं तक की सोच संयुक्त परिवार को लेकर चलने वाली है। घसनिन बाई का कहना है कि उनके मायके में भी सभी लोग संयुक्त परिवार में रहते थे। उन्होंने अपने माता पिता से संयुक्त परिवार के संस्कार सीखे।

सभी अपना-अपना काम मिल बांटकर करते हैं

वहीं जीवनलाल देवांगन का कहना है कि परिवार हमेशा एक रहना चाहिए। उनके घर में हमेशा शादी-ब्याह जैसा माहौल रहता है। घर में करीब 32 लोग एकजुट होकर रहते हैं। सभी लोग अपना-अपना काम मिल बांटकर करते हैं।

बहू ने कहा- 5 उंगली में अंगूठा ना रहे तो कैसा लगेगा

परिवार की बैंककर्मी बहू कहती हैं कि वो संयुक्त परिवार के बारे में सीखकर आई हैं। हाथ की पांच उंगली हैं। पांचों उंगली का अपना एक महत्व है। उसमें अंगूठा ना रहे तो कैसा लगेगा। इसलिए संयुक्त परिवार बंद मुट्ठी की तरह है और उसे उसी तरह रहना चाहिए।

कैसे हुई थी विश्व परिवार दिवस मनाने की शुरुआत हर साल 15 मई का दिन अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से की गई थी। इस दिन को पहली बार 15 मई 1994 में मनाया गया था। हालांकि इसकी नींव 1989 में ही पड़ चुकी थी।

साल 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में परिवार के महत्व पर चर्चा की गई थी और इसके लिए एक दिन समर्पित करने पर विचार किया गया था। बाद में साल 1993 में UNGA ने एक संकल्प में फैमिली डे के लिए 15 मई की तारीख तय कर दी और तब से हर साल इस दिन को मनाया जा रहा है।

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