खनिज विभाग के अफसरों ने साधी चुप्पी, खदान संचालकों ने मचा रखी लूट
कांग्रेस सरकार के समय नीलामी में रेत घाट लेने वाले संचालकों की मनमानी
जब कोई व्यक्ति किसी नामुमकिन कार्य को करता है, तब उसके लिए 'रेत से तेल' निकालने का मुहावरा प्रयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ में इन दिनों रेत को लेकर यह मुहावरा सबकी जुबान पर चढ़ गया है। दरअसल राज्य में रेत का खेल पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय से शुरू हुआ, जो भाजपा सरकार में भी जमकर फल-फूल रहा है। जानकारों की मानें तो रेत से सरकार को महज 100 करोड़ का राजस्व मिलता है, किंतु रेत से अवैध कमाई सालाना 900 करोड़ की जाती है। इसमें कमाई का भारी हिस्सा नीचे से लेकर ऊपर तक बंट रहा है। रेत के इस खेल में कोई दूध का धुला नहीं है। इसमें सबकी मिलीभगत है और रेत से भरी हजारों हाईवा प्रतिदिन रेत घाटों से निकल रही हैं। रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर सबने आंखें मूंद ली हैं, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, खनिज विभाग यहां तक जनप्रतिनिधियों को भी रेत का खेल रास आ रहा है। भले ही इसके चलते पर्यावरण को नुकसान हो या एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ रही हो, किंतु राजनांदगांव से लेकर रायपुर, धमतरी से लेकर महासमुंद तक, बिलासपुर और बस्तर और सरगुजा जैसे संभाग में भी रेत के खेल की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों की मानें तो रेत घाटों से रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन का काम इस कदर जारी है कि रेत की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। वहीं छत्तीसगढ़ की रेत महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों तक भी सप्लाई हो रही है
बता दें कि छत्तीसगढ़ में 212 रेत घाट आबंटित हैं, उसमें से केवल दो तीन दर्जन रेत घाटों को ही रायल्टी पर्ची जारी की गई है। अधिकांश रेत घाट अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। रेत घाटों से जो शिकायतें मिल रही हैं, उसके मुताबिक रेत खदानों के संचालक खुलकर प्रति हाईवा 5000 से 7000 रुपए लोडिंग की वसूली कर रहे हैं। इतना ही नहीं रेत खदान संचालक अब सोशल मीडिया के जरिए भी रेत लोडिंग की प्रतिदिन बढ़ी हुई कीमत शेयर कर रहे हैं। इसे लेकर खनिज विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं और उपभोक्ताओं को महंगी दर पर रेत खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के करीब चार महीने बाद बाद श्री गौण खनिज को लिकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। वर्तमान में रेत खदानों की नीलामी विधि रिवर्स आक्शन के नियम के अनुसार कर दी गई है, जिसके चलते पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय नीलामी में रेत घाट लेने वाले संचालकों की दबंगई बढ़ गई है। जानकार सूत्रों का सीधा आरोप है कि जिन्हें नीलामी में रेत घाट मिला था, उसमें से अधिकांश रेत घाट संचालकों ने नई सरकार के जनप्रतिनिधियों के साथ सांठगांठ कर ली है और रेत का उत्खनन कर रहे हैं।
रेत घाटों को लेकर अनिर्णय की स्थिति
दरअसल हुआ ऐसा है कि 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री श्री साय के शपथ ग्रहण के बाद करीब महीने भर रेत घाट बंद रहे। इस बीच कलेक्टरों ने अपने तरीके से रेत घाटों का संचालन किया। इस बीच राज्य सरकार रेत घाटों को लेकर कोई नीतिगत निर्णय नहीं पाई और 140 दिन गुजर जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है। साथ ही वर्तमान में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता भी प्रभावी हो गई है। इसका सीधा फायदा वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने उठाया और रेत घाट संचालकों से साठगांठ कर ली, जिसके बाद अधिकारियों ने भी मौन साध लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि रेत घाट संचालक मनमानी वसूली करने लगे, यह सिलसिला अब तक जारी हैं।
छत्तीसगढ़ हाईवा परिवहन संघ ने की शिकायत
रेत घाटों में चल रही मनमानी की शिकायत गत दिनों रायपुर कलेक्टर से छत्तीसगढ़ हाईवा परिवहन कल्याण संघ ने की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल, महासचिव प्रदीप चंद्राकर, उपाध्यक्ष शैलेंद्र त्वंद्राकरा ने अपनी शिकायत में कलेक्टर को बताया कि रायपुर जिले के कुरूद, काकदेही और पारागांव रेत खदानों में 5000 से 7000 रुपये लोडिंग प्रति हाईवा खुले तौर वसूला जा रहा है और शासन-प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। उन्होंने कलेक्टर से कार्रवाई की मांग करते हुए खनिज अधिकारियों को निर्देशित करने का आग्रह किया।
क्या हैं टेंडर नियम
नीलामी टेंडर के नियमानुसार रेत खदानों में लोडिंग 115 रुपए प्रति मीटर रायल्टी के साथ होनी चाहिए, परंतु रेत ठेकेदार रॉयल्टी के साथ हाईवा मालिकों से 10 हजार तक दर वसूल रहे हैं। जिस पर परिवहन भाड़ा जोड़कर प्रति हाईवा रेत की कीमत आसमान छू रही है। चूंकि वर्तमान समय में ही निर्माण कार्य ज्यादा होते हैं, इसलिए रेत की जहां मारामारी मची हुई है। वहीं रेत घाटों में संचालकों की दबंगई किसी अनजान खतरे की ओर इशारा कर रही है।
Comments