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भारत से जा रहे वर्कर्स इजराइल, कहा- गरीबी में जीने से कहीं ज्यादा अच्छा है, अमीरी में मर जाना

लखनऊ/ 'मैंने न्यूज में बम से उड़ती इमारतें, सड़कों पर खून-खराबा और जान बचाने के लिए भागते लोगों को देखा है। इजराइल में जंग की खबरें देखकर मन घबरा जाता था। जब पता चला कि बेटा नौकरी के लिए वहीं जाना चाहता है तो मैं परेशान हो गया। उसे बहुत समझाया, लेकिन वो समझने के लिए तैयार नहीं है। कहता है- पापा, आप लोगों के लिए ही इजराइल जा रहा हूं। मना मत कीजिए।'

77 साल के माता प्रसाद इन दिनों बहुत फिक्रमंद हैं। उनके 41 साल के बेटे राम शंकर एक महीने बाद नौकरी के लिए इजराइल जाने वाले हैं। 7 अक्टूबर 2023 से इजराइल और हमास के बीच युद्ध चल रहा है। इस वजह से इजराइल ने फिलिस्तीनी वर्कर्स को काम देना बंद कर दिया है। 4 महीने से बंद पड़े कंस्ट्रक्शन वर्क को दोबारा शुरू करने के लिए इजराइल को नए वर्कर्स चाहिए। इसलिए वो भारत से 40 हजार स्किल्ड वर्कर्स को बुला रहा है। रामशंकर इन्हीं में से एक हैं।

भारत से लोग काम के लिए इजराइल क्यों जाना चाहते हैं, ये भर्तियां कौन करा रहा है, वहां काम क्या होगा, कितनी सैलरी मिलेगी, सिक्योरिटी की क्या गारंटी है, इन सवालों के जवाब जानने दैनिक भास्कर इजराइल जाने के लिए सिलेक्ट हो चुके लोगों के घर पहुंचा। इस प्रोजेक्ट पर सरकार के सीनियर अफसर से लेकर फॉरेन एक्सपर्ट्स से भी बात की। 


खतरा तो है, लेकिन परिवार के लिए जोखिम उठाने को तैयार

रामशंकर परिवार के साथ लखनऊ के तेलीबाग इलाके में रहते हैं। इजराइल जाने के लिए जरूरी टेक्निकल टेस्ट पास कर चुके हैं। अब उन्हें फाइनल अप्रूवल का इंतजार है, जो कभी भी आ सकता है। हमने रामशंकर से पूछा कि क्या आपको इजराइल के हालात के बारे में पता है? रामशंकर कहते हैं, ‘हां, जानता हूं कि वहां के हालात खतरनाक हैं, लेकिन मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है। मुझे पत्नी, दोनों बच्चों और मम्मी-पापा का ख्याल रखना है। इसलिए मैंने इजराइल जाने के लिए फॉर्म भर दिया है।’

इस भर्ती के बारे में पता कैसे चला? रामशंकर कहते हैं, ‘न्यूज पेपर में पढ़ा था। लखनऊ ITI में जॉब कैंप लगा था, वहां अप्लाय किया। इजराइल से आए लोगों ने मेरा टेस्ट लिया और मैं प्रेक्टिकल में पास हो गया। अभी लेबर डिपार्टमेंट से डॉक्यूमेंट्स का पुलिस वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसके बाद फाइनल अप्रूवल मिल जाएगा।’

रामशंकर जल्दी इजराइल जाना चाहते हैं। दूसरी तरफ उनकी पत्नी गुंजन इससे खुश नहीं हैं। पति की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, ‘इजराइल वाली जॉब के लिए इन्होंने कुछ नहीं बताया। बस टेस्ट देकर आ गए। हमें पता चला तो पूरा घर परेशान हो गया। हम सभी जाने से मना कर रहे हैं, लेकिन ये अच्छी सैलरी के चक्कर में इजराइल जा रहे हैं।’

इजराइल में 5 गुना ज्यादा सैलरी मिलेगी

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अभी इजराइल में 18 हजार भारतीय नौकरी कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर मेडिकल फील्ड में नर्स और हेल्पर हैं। अभी जो भर्ती अभियान चल रहा है, उसमें लोहे की बाइंडिंग, फ्लोर-टाइल्स सेटिंग, राजमिस्त्री, प्लास्टरिंग और शटरिंग कॉरपेंटर जैसे काम में एक्सपर्ट लोगों को चुना गया है।

रामशंकर कहते हैं, ‘भारत में स्टील फिटिंग और लोहे की बाइंडिंग जैसे काम के लिए एक दिन के 500 से 700 रुपए मिलते हैं। इजराइल में जो सैलरी मिलेगी, वो भारत में मिलने वाली मजदूरी से 5 गुना ज्यादा है। हमें बताया गया है कि वहां इसी काम के लिए हर महीने 1 लाख रुपए से ज्यादा सैलरी मिलेगी।’

इजराइल सरकार की एजेंसी Population and Immigration Authority ने भारत से जाने वाले वर्कर्स के लिए सैलरी स्ट्रक्चर जारी किया है। इसके मुताबिक, उन्हें हर महीने 1.37 लाख रुपए सैलरी दी जाएगी। भारत से उन्हीं कामगारों को इजराइल भेजा जाएगा, जिनके पास मैकेनिकल या फिर कंस्ट्रक्शन ट्रेड में डिप्लोमा है।

गरीबी में जीने से कहीं ज्यादा अच्छा है, अमीरी में मर जाना

बाराबंकी के रहने वाले 26 साल के सुनील कुमार पासवान की पिछले साल शादी हुई है। ज्यादा पैसे कमाने के लिए वे भी इजराइल जाने के लिए अप्लाय कर चुके हैं। सुनील कहते हैं, ‘मैं 23 जनवरी की सुबह लखनऊ के ITI सेंटर गया था। वहां पहले से 200 लोग मौजूद थे। मैंने भी फॉर्म भर कर टेस्ट के लिए अप्लाय कर दिया।’

‘पत्नी नहीं चाहती कि मैं विदेश जाकर काम करूं, लेकिन 500 रुपए दिहाड़ी में कब तक काम चलेगा। खतरा तो हर जगह है। इसलिए ऐसी जगह पर रहना अच्छा है, जहां आपको ज्यादा पैसा म‍िले। मैं मानता हूं कि अमीरी में मर जाना, गरीबी में जीने से कहीं बेहतर है। इसलिए मैं इजराइल जाकर काम करने के लिए तैयार हूं।’

सुनील ग्रेजुएट हैं और पेशे से राजमिस्त्री हैं। उनके मुताबिक, इजराइल में नौकरी के लिए हुए टेस्ट में उनसे एग्रीमेंट लेटर पर साइन करवाया गया। इसमें लिखा था कि इजराइल में हर महीने 236 घंटे और हफ्ते में 42 घंटे काम करना होगा। छुट्टियों के दौरान किसी दूसरी कंपनी में काम करने की परमिशन नहीं होगी। कम से कम 3 साल और मैक्सिमम 5 साल के लिए नौकरी करनी होगी।

40 हजार वर्कर्स को इजराइल भेजेंगे 

7 अक्टूबर, 2023 को फिलिस्तीनी संगठन हमास के लड़ाकों ने इजराइल पर अटैक कर दिया था। इस हमले में करीब 1200 लोगों की मौत हो गई। हमास के लड़ाके 200 लोगों को अगवा करके गाजा पट्‌टी ले गए थे।

इस घटना के बाद इजराइल ने गाजा पर हमला बोल दिया। इस बीच इजराइल में फिलिस्तीनियों के काम करने पर पाबंदी लगा दी गई। इस फैसले का असर इजराइल में काम कर रहे करीब 60 हजार फिलिस्तीनी कामगारों पर पड़ा।

युद्ध की वजह से इजराइल में कंस्ट्रक्शन का काम ठप हो गया। इसकी भरपाई के लिए बड़ी संख्या में वर्कर्स की जरूरत है। ये अब भारत की मदद से पूरी हो रही है। इजराइल और भारत सरकार के बीच मई, 2023 में इसके लिए समझौता हुआ था। इसके तहत करीब 40 हजार लोगों को नौकरी पर इजराइल भेजा जाएगा।

वर्कर्स की भर्ती के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रजिस्ट्रेशन और टेस्ट चल रहे हैं। जनवरी, 2024 को इजराइल से 15 लोगों की टीम भर्ती के लिए हरियाणा और UP आई थी। पहले फेज में UP से 5,087 और हरियाणा से 530 लोगों को चुना गया है। ये सभी वर्कर्स मार्च में इजराइल चले जाएंगे।

UP सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर कहते हैं, ‘इजराइल जाकर काम करने के इच्छुक अभ्यर्थी सिलेक्शन के सेकेंड फेज में भी अप्लाय कर सकते हें। 28 फरवरी से 8 मार्च तक कैंडिडेट्स का टेस्ट होगा। इसलिए सभी जल्द आवेदन जमा कर दें।’

इजराइल जाने वाले वर्कर्स की भर्ती प्रक्रिया पर हमने UP के डिप्टी लेबर कमिश्नर शमीम अख्तर से बात की। वे कहते हैं, ‘ये भर्तियां बेसिक कंस्ट्रक्शन के काम के लिए हो रही हैं। हमने स्किल्ड वर्कफोर्स को ही इस प्रोग्राम के लिए चुना है। उन्हीं को विदेश भेजा जाएगा, जो ITI सेंटर पर हुए टेस्ट में पास हुए हैं।'

'टेक्निकल टेस्ट में पास होने के बाद कैंडिडेट्स का मेडिकल होता है। इसके बाद उनके डॉक्यूमेंट्स पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भेजे जा रहे हैं। भर्तियां भारत की सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, यानी NSDC के जरिए हो रही हैं।’

NSDC के मुताबिक, भारत से जाने वाले कामगारों को हर महीने सैलरी के अलावा रहने की जगह और मेडिकल फैसिलिटी भी दी जाएंगी।

इजराइल को वर्कर्स की जरूरत

दैनिक भास्कर ने वर्कर्स की भर्ती के लिए इजराइल से भारत आए बनी अहरोन से बात की। इजराइल सरकार के कंसल्टेंट बनी कहते हैं, ‘इजराइल में अभी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की बहुत कमी हो गई है। हमारे यहां सभी कंस्ट्रक्शन साइट बंद हैं। इन्हें दोबारा शुरू करने के लिए काफी मैनपावर की जरूरत है।’

‘भारत सरकार की मदद से हम लगातार वर्कर्स का इंटरव्यू कर रहे हैं। सबसे पहले हम हरियाणा के लोगों से मिले। वहां 30% बिल्डिंग वर्कर्स ने इजराइल जाने के लिए अप्लाय किया है। हमें सबसे अच्छा रिस्पॉन्स उत्तर प्रदेश में मिला। यहां 5 हजार से ज्यादा लोगों ने इजराइल में काम करने के लिए टेस्ट दिया है। इनमें से ज्यादातर ने कुवैत, बहरीन और कतर जैसी जगहों पर काम किया हुआ है।’

वर्कर्स को लाइफ इंश्योरेंस भी मिलेगा

इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश लेबर डिपार्टमेंट के डायरेक्टर ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट IAS कुणाल सिल्कू को दी गई है। कुणाल कहते हैं, ‘23 से 30 जनवरी तक हुए पहले राउंड के इंटरव्यू में अलग-अलग राज्यों से 7 हजार वर्कर्स के आवेदन मिले थे। इनमें से हरियाणा और UP के 5500 कैंडिडेट सिलेक्ट हुए हैं। इन्हें इजराइल की एजेंसी पॉपुलेशन एंड बॉर्डर अथॉरिटी नौकरी पर रखेगी।’

खतरे के बावजूद वर्कर्स इजराइल जा रहे...क्यों 

सभी वर्कर्स को पता है कि इजराइल में इस वक्त युद्ध चल रहा है। इसके बावजूद वे वहां जा रहे हैं। इसकी वजहों पर हमने लखनऊ के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के एकेडमिक डीन रहे प्रोफेसर एपी त्रिपाठी से बात की। वे इस सोच के पीछे तीन फैक्टर बताते हैं।

1. भारत में इतनी सैलरी मिलना नामुमकिन

ये ह्यूमन टेंडेंसी है कि जहां ज्यादा पैसा मिलेगा, उसी तरफ वर्कर्स का माइग्रेशन होगा। इजराइल में हर महीने 1.37 लाख रुपए मिलेंगे। भारत में इस तबके को इतना पैसा मिलना नामुमकिन है।’

2. भारत में दिहाड़ी मजदूरी अस्थायी काम

भारत में दिहाड़ी मजूदरी अस्थायी काम है, यानी आज काम है तो कल शायद न हो। इसलिए यहां के वर्कर लंबे वक्त की नौकरी में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। यही कारण है कि जान जोखिम में होने के बावजूद ये वर्कर्स अपने जीवन में स्थिरता के लिए इजराइल जाने से नहीं कतरा रहे हैं।

3. युद्ध के बाद इजराइल में वर्कर्स की डिमांड बढ़ेगी

ऐसा देखा गया है कि युद्ध के बाद कंस्ट्रक्शन का काम तेजी से होता है। इजराइल में इस वक्त री-कंस्ट्रक्शन का फेज चल रहा है। इसलिए आने वाले समय में वहां वर्कर्स की डिमांड बढ़ेगी। लिहाजा, भारत से इजराइल जाने वाले कामगारों की संख्या में जबरदस्त उछाल देखा जा सकता है। हालांकि, ये बात दोनों मुल्कों के बीच आपसी रिश्तों पर ज्यादा निर्भर करेगी।

यरुशलम के नजदीकी हिस्सों में अब भी तनाव

यूनाइटेड नेशंस डिसइंगेजमेंट ऑब्जर्वर फोर्स, यानी UNDOF इजराइल में शांति बनाने पर काम कर रही है। इस फोर्स से एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर हमसे फोन पर बात की। ये अधिकारी 14 महीनों से इजराइल में तैनात हैं।

उन्होंने बताया, ‘इजराइल में वर्किंग कंडीशन ठीक हैं। पूरी कंट्री में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि यरुशलम के पास के कुछ हिस्से और साउथ की तरफ पड़ने वाली गाजा स्ट्रिप के रीजन में कभी-कभी तनाव बढ़ जाता है। इन पॉइंट्स के अलावा सभी हिस्सों में इजराइली फोर्स का 100% कंट्रोल है, इसलिए यहां शांति बनी रहती है।’

‘हमास के साथ जंग के बाद अब इजराइल में हालात सुधर रहे हैं। यहां लोगों ने फिर से खेती शुरू कर दी है। कई हिस्सों में कंस्ट्रक्शन भी शुरू हो गया है। ऐसे में जो वर्कर्स यहां आकर काम के दौरान ज्यादा पैसे बचा लेंगे, उनके लिए ये मिशन फायदे का सौदा साबित होगा।’

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