अयोध्या में 22 जनवरी को राममंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सूर्योदय योजना का ऐलान किया।
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इस योजना का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना, बिजली की कमी को दूर करना और पर्यावरण को बचाना है। इस योजना से एक करोड़ लोग लाभान्वित होंगे।
- सूर्योदय योजना क्या है, इसका क्या उद्देश्य है?
- किन लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा?
- ये योजना कब से शुरू होगी?
पीएम मोदी द्वारा लांच की गई 'प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना' क्या है?
जवाब: सूर्योदय योजना के तहत देश भर के एक करोड़ से ज्यादा घरों की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। सरकार की यह योजना 40 गीगावॉट रूफटॉप सोलर क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने की एक नई कोशिश है। साथ ही इसका मकसद ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
जिन घरों में ये सोलर पैनल लगेंगे, उनकी बिजली की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा के जरिए पूरा हो जाएगा। साथ ही उनके बिजली बिल में भी कमी आएगी।
प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना का उद्देश्य रूफटॉप सोलर प्रोग्राम के जरिए गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को आसान तरीके से बिजली उपलब्ध करवाना है।
सोलर पैनल क्या होता है, जिसके जरिए सूरज की रौशनी से बिजली बनती है?
जवाब: सूर्य हमारी धरती पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। पूरे साल में औसतन सूर्य से धरती के प्रति स्क्वायर मीटर क्षेत्र को 342 वॉट सोलर एनर्जी प्राप्त होती है। 342 वॉट सोलर एनर्जी सामान्य इलेक्ट्रिसिटी की 100 यूनिट्स के बराबर है। अब मान लीजिए कि एक परिवार महीने में 100 यूनिट बिजली खर्च करता है तो 12 स्क्वायर मीटर एरिया की सोलर एनर्जी से उसकी बिजली की जरूरतें पूरी हो सकती हैं।
लेकिन उस सौर ऊर्जा को पावर में कन्वर्ट करने के लिए उसे एक जगह संघनित करना होता है और ये काम करते हैं सोलर पैनल। इन पैनल्स में सोलर प्लेट्स लगी होती हैं, जिनके जरिए सूर्य की ऊर्जा इलेक्ट्रिसिटी में बदली जाती है।
सोलर पैनल इस तरह काम करता है
घर में सोलर पैनल को छत पर लगाया जाता है या फिर ऐसी जगह, जहां सूरज की सीधी रोशनी आती हो।
यह पैनल फोटोवोल्टिक सेल्स से बने होते हैं। सूरज की किरणों को यह बिजली में कन्वर्ट करते हैं। इन सेल्स के बीच में सेमीकंडक्टिंग पार्टिकल्स की परतें होती हैं। जो सूरज की किरणों के संपर्क में आने के बाद सक्रिय हो जाती हैं। इससे एक इलेक्ट्रिक फील्ड बनता है, जिसे फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट कहा जाता है। इसी से बिजली जनरेट होती है।
यानी सोलर पैनल से बनने वाली बिजली का सीधा इस्तेमाल नहीं होता है। उसे एक इनवर्टर की मदद से इस्तेमाल करने वाली बिजली में बदला जाता है।
इस बिजली और पावर ग्रिड से आने वाली बिजली में कोई फर्क नहीं होता है। दोनों समान रूप से प्रभावी हैं।
घर में रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने से क्या फायदा होगा?
जवाब: सोलर पैनल से कई फायदे होते हैं। ये बिजली बिल के खर्च को कम करने से लेकर पर्यावरण को सुरक्षित रखते हैं। इनसे होने वाले फायदों को नीचे लगे क्रिएटिव से समझते हैं-
सूर्योदय योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा?
जवाब: इस योजना का सबसे बड़ा लाभ गरीब और मध्यम तबके के लोगों को होगा। अभी इस वर्ग को अपनी आय का बड़ा हिस्सा बिजली बिल भरने में खर्च करना पड़ता है। इस योजना का लाभार्थी बनने की शर्तों को नीचे लगे ग्राफिक से समझते हैं-
सूर्योदय योजना में आवेदन करने के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की आवश्यकता होगी?
प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना में आवेदन करने के लिए आवेदक के पास 8 दस्तावेज होने चाहिए।
- आवेदक का आधार कार्ड
- निवास प्रमाणपत्र
- बिजली का बिल
- आवेदक का आय प्रमाण-पत्र
- मोबाइल नंबर
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट साइज फोटो
- राशन कार्ड
ये योजना कब से शुरु होगी?
फिलहाल इस बारे में अभी कोई अपडेट नहीं आया है कि योजना कब से शुरू होगी। सरकार जल्द ही इसकी घोषणा करेगी। अभी सरकार सोलर एनर्जी से जुड़ी 'नेशनल रूफटॉप स्कीम' चला रही है। इस योजना के तहत लोगों को सोलर पैनल लगवाने में 40 फीसदी सब्सिडी भी दी जाती है।
अगर खुद से सोलर पैनल लगवाएं तो इसका खर्च कितना आता है?
घर, ऑफिस या खेत में सोलर पैनल से बिजली बनाने का खर्च पैनल के मॉड्यूल और इनवर्टर पर निर्भर करता है। 1 किलोवॉट का सोलर पैनल लगाने में 45 से 85 हजार रुपए तक का खर्च आता है।
पैनल के अलावा बैटरी का खर्च अलग होता है। इसी तरह 5 किलोवॉट के सोलर पैनल को लगवाने में 2.25 से 3.25 लाख रुपए तक का खर्च आता है।
क्या बारिश, धूप न निकलने या कोहरा होने पर सोलर पैनल काम करता है?
जवाब: कोहरे और बादल वाले दिनों में सोलर पैनल से बाकी दिनों की अपेक्षा कम पावर जनरेट होती है। लेकिन सोलर पैनल इतनी एनर्जी तो जनरेट कर ही लेता है कि आपके घर में अंधेरा नहीं होगा। पंखे-बल्ब जैसे सामान्य अप्लायंसेज चलते रहेंगे।
बस बादल और कोहरे वाले दिनों में हैवी लोड उपकरण सोलर पैनल से नहीं चलाना चाहिए क्योंकि हैवी लोड एक बार में ही सारी एनर्जी खींच लेगा।
सोलर पैनल एक बार लगवाने के बाद कितने समय तक चलते हैं?
अधिकांश सोलर पैनलों पर कम से कम 25 साल की वॉरंटी होती है। कई सोलर पैनल तो ऐसे हैं, जो मामूली खराबी और मेन्टेनेंस के साथ कई दशकों तक विश्वसनीय रूप से काम करते रहते हैं।

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