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फ़िल्मी किरदार में 12वीं फेल होने वाला वह लड़का IPS बनकर ही दम लेता है, पढ़ाई करने वालों के लिए कितना सही है प्यार?

पिछले दिनों फिल्म 12th फेल काफी चर्चा में रही। फिल्म में IPS मनोज शर्मा का किरदार अपनी लवर से कहता है- 'तुम आई लव यू कह दो तो मैं दुनिया पलट दूंगा।' प्रेम स्वीकार होने के बाद 12वीं फेल होने वाला वह लड़का IPS बनकर ही दम लेता है।

इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है। बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते मिल जाएंगे कि लड़का तो अच्छा था, प्यार-मोहब्बत के चक्कर में बर्बाद हो गया। ‘इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया’ की तर्ज पर लैला-मजनू, बैजू बावरा और शीरीं-फरहाद टाइप के उदाहरण भी देखने को मिलते रहते हैं। जो इश्क में अपना सबकुछ लुटा बैठे।

प्यार के सिक्के के किस पहलू पर भरोसा किया जाए? क्या प्यार बर्बाद करता है या फिर यह आबाद करने का जरिया है? प्यार में पड़कर जीवन संवर जाएगा या फिर खुशियां और चैन और सुकून खोकर मारे-मारे फिरेंगे? पढ़ने-लिखने वाले युवाओं को प्यार करना भी चाहिए कि नहीं?

दुनिया के जाने-माने रिलेशनशिप साइकोलॉजिस्ट निकॉल वॉटकिंस ने 18 से 35 साल के 909 युवाओं पर एक स्टडी की है। इसमें सिंगल और रिलेशनशिप में रहने वाले युवा शामिल हुए। इस रिसर्च में उन्होंने तहकीकात की कि कब प्यार करियर और खुशियों में मददगार है और कब यह मुश्किलों का सबब बन सकता है।

 कब प्यार करना फायदेमंद है और कब यह जी का जंजाल बन सकता है।

प्यार खुशियों के रंग भरेगा या गम देगा, यह उसकी तासीर पर निर्भर

निकॉल वॉटकिंस ने अपनी रिसर्च में पाया कि प्यार के फायदे और नुकसान दोनों संभव हैं। लोगों के हिस्से क्या आएगा, यह उनके प्यार की गहराई और स्थिति पर निर्भर करता है।

जहां एक ओर लॉन्ग टर्म इंटिमेट रोमांटिक कनेक्शन दिलो-दिमाग को 82 तरीके से फायदे दिला सकता है। तो वहीं दूसरी ओर, लड़ाई-झगड़े, भरोसे की कमी और सिर्फ दिखावे या सोशल प्रेशर के चलते बनाया गया रोमांटिक रिलेशन डिप्रेशन, एंग्जायटी, रिलेशनशिप फटीग जैसे मेंटल प्रॉब्लम्स को बढ़ावा दे सकता है।

कभी खुशी-कभी गम…


रिलेशनशिप डिजायर- प्यार और साथी की चाहत तो होती है लेकिन वह पूरी नहीं हो पाती। सिंगल्स पार्टनर की तलाश कर रहे होते हैं। ऐसी स्थिति में सिंगल्स कुंठित हो सकते हैं। सेक्शुअल और इमोशनल डिजायर अधूरी रहने से ग्रॉस हैप्पीनेस पर नकारात्मक असर पड़ता है।

रिलेशनशिप डिस्मिसल- प्यार या रिश्ते में आना ही नहीं चाहते। हैप्पी सिंगल होते हैं। ये अपनी कंपनी इंजॉय करते हैं और खुश रहते हैं।

सोशल प्रेशर वाला रिश्ता- सिर्फ सिंगल होने के टैग को हटाने के लिए ‘रिलेशनशिप डिस्मिसल’ सोच के कई युवा भी रिश्ते में आ जाते हैं। यह सोशल प्रेशर की वजह से बनाया गया दिखावे वाला रिश्ता होता है। इस तरह का रिश्ता ग्रॉस हैप्पीनेस, वेलबीइंग और करियर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

इंटिमेट रोमांटिक कनेक्शन- जब किसी रिश्ते के दोनों पार्टनर्स में पहले रिलेशनशिप डिजायर रहा हो और वे सोच-समझ कर रिश्ते में आएं। ऐसी स्थिति में दोनों पार्टनर्स के मन में रिश्ते और खुद के लिए रोडमैप तैयार होता है। इसकी वजह से उनका ग्रॉस हैप्पीनेस, वेलबीइंग और करियर सबको फायदा होता है। ध्यान रखें कि यह एक-तरफा प्यार नहीं होता।

‘ब्रेन, बिहेवियर एंड इम्युनिटी’ हेल्थ जर्नल में हाल ही में यह रिसर्च पब्लिश हुई है, जिसके मुताबिक रोमांटिक पार्टनर की फिजिकल मौजूदगी हमारे शरीर के हॉर्मोन्स को कंट्रोल करती है। इस दौरान तन और मन को नुकसान पहुंचाने या बीमार करने वाले हॉर्मोन बनने कम हो जाते हैं। साथ ही उन हॉर्मोंस का प्रोडक्शन बढ़ जाता है, जो सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं।

मजनू और बैजू बावरा बना सकता है दिखावे का प्यार या टॉक्सिक रिश्ता

रिलेशनशिप कोच और साइकोलॉजिकल रिसर्च बताती हैं कि लॉन्ग टर्म रोमांटिक रिलेशनशिप फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। प्यार में पड़े शख्स की खुशियां भी पहले के मुकाबले बढ़ सकती हैं। लेकिन ये फायदे तभी होंगे जब उनका प्यार कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करे। अगर ऐसे न हो तो प्यार और रिश्ता फायदा पहुंचाने के बदले बैकफायर भी कर सकता है।

एक-तरफा प्यार, बिना भरोसे का रिश्ता, शोऑफ जैसी कवायदें प्यार में बीमार करने के लिए काफी हैं।

क्या करें कि प्यार पढ़ाई और करियर में रुकावट न बने? प्यार और पार्टनर करियर और पढ़ाई में रुकावट न बने, इसके लिए क्या करना चाहिए? क्या करें कि प्यार करियर और पढ़ाई में मददगार साबित हो?

 डॉ. अंजलि स्ट्रेस फ्री लव के लिए ये उपाय बताती हैं-

रिश्ते में एक हेल्दी बाउंड्री सेट करें। किस हद तक प्यार करना है और करियर को लेकर कितनी संजीदगी रखनी है, यह क्लियर कर लेना बेहतर है।

पार्टनर के साथ अपना गोल शेयर करें, उसे अपने सपनों के बारे में बताएं और साथ देने के लिए शुक्रिया कहना न भूलें।

रिश्ते में कुछ साझा लक्ष्य निर्धारित करें। करियर या पढ़ाई की वजह से साथी को कम वक्त दे पा रहे हों तो उसे साझा लक्ष्य के रूप में लें। अपने सपनों और फैसलों के साथ पार्टनर को भी जोड़ें।

सही पार्टनर और रिश्ते का चुनाव जरूरी है। रोमांटिक रिश्ता और करियर दोनों साथ-साथ तभी चल पाएंगे, जब उसकी बुनियाद सही हो। ऐसे मामलों में खूब सोचने-परखने के बाद ही साथी और रिश्ते का चुनाव करना चाहिए।

अपने पार्टनर के करियर-पढ़ाई को भी सपोर्ट करें। रिश्ते के साथ करियर पर भी ध्यान देना चाहते हों तो पार्टनर को भी वैसा ही करने के लिए प्रेरित करें। रिश्ते में जो खुद चाहते हों, उसे पार्टनर को देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

कोई भी फैसले साथ मिलकर ही लें।

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