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खाने में स्मोकी फ्लेवर लाने के लिए तड़का लगाने या बघारने से लेकर तंदूर, ग्रिलिंग और बारबेक्यू जैसे तरीके बना रहे दिल को बीमार

खाने में स्मोकी फ्लेवर लाने के लिए तड़का लगाने या बघारने से लेकर तंदूर, ग्रिलिंग और बारबेक्यू जैसे तरीके इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। बैंगन भर्ता, लिट्टी-चोखा और धुंआर दाल से लेकर रायता समेत तमाम सब्जियों व मीट तक का स्वाद और फ्लेवर बिना धुएं के नहीं आता। अब तो तंदूरी चाय भी पॉपुलर है और गैस के जरिए कॉकटेल को भी स्मोकी फ्लेवर दिया जा रहा है।

'धुआंरा' का अर्थ है धुआं लगाना, जिसे धूनी और धुंगार भी बोलते हैं। आग जलाकर तपस्या में लीन हो जाने पर बोला जाने वाला 'धूनी रमाने' वाला मुहावरा भी ऐसे ही बना है। लेकिन, खाने में धुएं का गलत तरीके से इस्तेमाल सेहत पर भारी पड़ सकता है।

न्यूट्रिशनिस्ट निधि अग्रवाल बताती हैं कि देश के हर हिस्से में ऐसे कई खास व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें स्वाद ही धुएं से आता है। अवध की बिरयानी, कोरमा, कबाब, दम पुख्त जैसे व्यंजन तैयार करते वक्त उन्हें खासतौर पर धुआंरा जाता है।

बिहार में लिट्टी-चोखा में धुआं न लगे तो उसे खाने का मजा ही किरकिरा हो जाएगा। नॉर्थ ईस्ट में तो राइस वाइन बनाने और मीट को प्रिजर्व करने के लिए भी धुएं का इस्तेमाल किया जाता है। राजस्थान में 'मास के सूले' का स्मोकी फ्लेवर एक बार जो चख ले, फिर कभी नहीं भूल सकता।

  • खाने को प्रिजर्व करने के लिए भी धुएं का इस्तेमाल

इंसान जब गुफाओं में रहते थे, तब उन्होंने धुएं से खाना प्रिजर्व करना सीखा। आज भी कई आदिवासी समुदायों में मीट को चिमनी में लटकाकर छोड़ दिया जाता है, ताकि धुआं लगने के बाद वह लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। इसी तरह, जम्मू में कद्दू से बनने वाले अम्बल से लेकर खट्टा मटन बनाते वक्त भी 'स्मोकिंग टेक्निक' यूज की जाती है।

बंगाल में रोहू मछली का स्वाद बढ़ाने के लिए उसमें धुआं लगाया जाता है। गोवा से लेकर मिजोरम तक स्मोक्ड नॉनवेज डिशेज बनती हैं। पुणे में तो अब आप बारबेक्यू जाकर ‘स्मोक्ड मिसल पाव’ भी खा सकते हैं।

लेकिन, धुएं से बढ़ता यह स्वाद सेहत को बिगाड़ रहा है, जानिए क्या हैं इसके खतरे...

खाने पर चढ़ जाती है कार्बन और जहरीले केमिकल्स की परत

धुएं में खाना पकने में ज्यादा वक्त लेता है। एसोसिएशन ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वजह से उसमें कार्बन और कई दूसरे केमिकल्स की परत चढ़ जाती है। यह कार्बन खाने की नली में पहुंचकर जम जाता है और कैंसर की वजह बनता है।

एक रिसर्च में चिमनियां साफ करने वाले मजदूरों की जांच की गई, तो वे प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में पाई गई। कैंसर की वजह बना चिमनी में जमे धुएं का कार्बन।

स्मोकिंग और ग्रिलिंग के दौरान खाने में हेट्रोसाइक्लिक एमाइन (एचसीए) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) जैसे जहरीले केमिकल बनने लगते हैं। नॉनवेज फूड में इन केमिकल्स का खतरा ज्यादा होता है। खाना जितनी ज्यादा देर तक पकता है, उसमें इन केमिकल्स की मात्रा उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाती है। ये केमिकल डीएनए को डैमेज कर देते हैं।

  • स्मोक्ड फूड से कैंसर की आशंका 9 गुना ज्यादा

लोग यह सोचकर स्मोक्ड फूड खाते हैं कि वह तले हुए खाने से अच्छा है, क्योंकि उसमें तेल और मसाला काफी कम होता है। लेकिन, अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक ग्रिल्ड, बारबेक्यू और स्मोक्ड फूड से कैंसर हो सकता है। इन तरीकों से खाने में स्मोकी फ्लेवर लाने के लिए कोयले और गैस का इस्तेमाल किया जाता है। जब ये जलते हैं, तब उनसे कई तरह के केमिकल रिलीज होते हैं। ऐसा खाना खाने से कैंसर का रिस्क 9 गुना बढ़ जाता है।

इंफेक्शन से डायरिया, गर्भपात तक का रिस्क

स्मोक्ड फूड से बैक्टीरिया का इंफेक्शन भी हो सकता है। स्मोकिंग, ग्रिलिंग जैसे तरीकों में खाना ठीक नहीं पकता और जिससे उसमें बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। जिसे खाने से उसमें मौजूद ई. कोलाई और लिस्टेरिया मोनोसाइटोजेन्स जैसे बैक्टीरिया पेट तक पहुंच जाते हैं। पेट में इंफेक्शन फैल जाता है और डायरिया, पेट दर्द, बुखार, सिरदर्द, लिस्टेरियोसिस जैसी समस्याएं जकड़ने लगती हैं।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक ज्यादा मात्रा में ऐसा खाना खाने से पेट का कैंसर भी हो सकता है। स्मोकिंग, ग्रिलिंग या फिर बारबेक्यू से तैयार मछलियां और दूसरे सी-फूड ज्यादा खाने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर और गर्भपात तक हो सकता है।

  • लग सकती हैं दिल की बीमारियां, डायबिटीज का भी खतरा

आमतौर पर स्मोकिंग के जरिए खाना पकाने में नमक भी यूज किया जाता है। जिससे उसमें सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है। एक हद तक तो यह मिनरल शरीर के लिए जरूरी होता है, लेकिन बॉडी में इसका स्तर ज्यादा बढ़ने से ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। सोडियम की ज्यादा मात्रा किडनी को भी नुकसान पहुंचाती है।

इसलिए किडनी और दिल के रोगों से जूझ रहे लोगों को स्मोक्ड फूड से दूर रहना चाहिए। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एक रिसर्च में यह भी पाया कि स्मोक्ड फूड से स्ट्रोक और टाइप-2 डायबिटीज भी हो सकती है।

खाने में स्मोकी फ्लेवर लाने का सबसे सेफ तरीका

इसके बाद भी अगर किसी खाने में स्मोकी फ्लेवर लाना ही चाहते हैं, तो ऐसे तरीके अपना सकते हैं, जो कुछ हद तक ज्यादा सेफ हैं। न्यूट्रिशनिस्ट निधि अग्रवाल बताती हैं कि सबसे बेहतर है कि खाना तैयार होने के बाद एक कटोरी की मदद से उसमें धुआं लगा दें।

उदाहरण के तौर पर स्मोकी रायता बनाने के लिए पहले रायता बनाकर एक बड़े बर्तन में रख लें। फिर कोयला गर्म कर एक छोटी कटोरी में रखें और ऊपर से घी व हींग डालें। जैसे ही धुआं निकलने लगे, कटोरी को रायता वाले बर्तन में रखकर ढंक दें। फिर 30 सेकेंड में उसे खोल दें। रायते में स्मोकी फ्लेवर आ जाएगा। लेकिन, फल और डेयरी प्रोडक्ट्स से तैयार होने वाली चीजों में कभी भी धुआं न लगाएं।

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