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यूरोपीय यूनियन ने दी कीड़ों को इंसानी भोजन मानने की मंजूरी; कई देशों में झींगुर और कई दूसरे कीड़ों से बना आटा खिलाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है

ट्यूरिन/ बरसात के दिनों में निकलने वाले झींगुर से अब स्वादिष्ट ब्रेड, पास्ता, बर्गर और प्रोटीन बनाया जा रहा है। इटली, चीन, वियतनाम, थाइलैंड सहित कई देशों में झींगुर और कई दूसरे कीड़ों से बना आटा खिलाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है।


10 लाख झींगुरों को रोज फूड आइटम में तब्दील करता है इटली का झींगुर फार्म

भुनभुनाते झींगुरों को उबालना, सुखाना और फिर फूड आइटम में बदलना भारतीयों के लिए अजीब बात हो सकती है लेकिन इटली के सबसे बड़े झींगुर फार्म में यह रोज का काम है।

यहां फार्म चलाने वाले इवान अलबानो के मुताबिक, झींगुरों से हम हल्का भूरा आटा बनाते हैं, जिसका इस्तेमाल पास्ता, ब्रेड, पैनकेक, एनर्जी बार और स्पोर्ट्स ड्रिंक बनाने में किया जाता है।

यूरोपीय यूनियन ने दी कीड़ों को इंसानी भोजन मानने की मंजूरी

हजारों साल से एशिया, अफ्रीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में झींगुर, चींटी और कीड़ों को खाना आम बात रही है। अब इस साल की शुरुआत में यूरोपीय यूनियन ने भी इंसान के भोजन के लिए कीड़ों की बिक्री को मंजूर दे दी है। लेकिन यहां पर कीड़ों को प्रोसेस करके उनसे दूसरे किस्म के फूड आइटम बनाए जाने लगे हैं जो अपने आप में नया है।

2 अरब लोग भोजन में कर रहे कीड़ों का इस्तेमाल

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक दुनिया में 2 अरब लोग कीड़ों को अपने भोजन में शामिल करते हैं। सदियों पहले रोमन अमीरों को लार्वा खाना पसंद था। हालांकि, अब पर्यावरण के लिहाज से इसे खाना अच्छा माना जा रहा है क्योंकि ये प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होते हैं। यही वजह है कि इस तरह की पहल करके लोगों को झींगुर की पौष्टिकता बिना स्वाद से समझौता किए दी जा रही है।

इटली ही नहीं दुनिया के कई हिस्सों में कीड़ों, पशुओं और चिड़ियों को प्रोसेस्ड करके फूड आइटम जैसे- आटा, अचार सहित कई रूपों में तैयार किया जा रहा है। कुछ देशों के चुनिंदा समुदायों और इलाकों में इस तरह के फूड आइटम का इस्तेमाल करने की लंबी परंपरा रही है।

घाना में दीमक को सुखाकर बनाते आटा

अफ्रीका देश घाना में भी कीड़ों का आटा बनाया जाता है। यहां लोग दीमक को जमा करते हैं और फिर सुखाकर उनका आटा बनाते हैं। इस तरह के आटे से कई तरह की डिश तैयार की जाती हैं। इस आटे से दलिया और सूप भी बनाए जाते हैं।

चीन में कीड़ों का प्रोटीन पाउडर बनाते हैं, मधुमक्खी का लार्वा खाते

चीन में चलने, रेंगने, उड़ने, तैरने वाले सभी जीव खाए जाते हैं। इनमें रेशम के कीड़े से लेकर मधुमक्खी का लार्वा तक शामिल है। यहां कीड़ों को प्रोसेस करने के बाद कई तरह के फूड प्रोडक्ट जैसे स्नैक्स, प्रोटीन पाउडर, सूप तैयार होते हैं।

रेशम के कीड़ों को चीन के स्थानीय बाजारों में कई तरह से पकाकर या डिब्बाबंद स्टॉक में बेचा जाता है। यह आमतौर पर चावल या नूडल्स के साथ फ्राई करके परोसा जाता है।

चमगादड़ जैसे पक्षी की लार से बनता स्वादिष्ट सूप

इसके अलावा स्विफ्टलेट पक्षी के घोंसले से सूप बनाया जाता है। यह पक्षी चमगादड़ की तरह अंधेरी गुफाओं में घोंसला बनाता है। इनके घोंसले उनकी ही जीभ के नीचे की ग्रंथियों की चिपचिपी लार से बनते हैं। हवा के संपर्क में आने से लार का घोंसला सख्त हो जाता है। चीन में इसके घोंसले को पानी में भिगोने के बाद धीरे-धीरे भाप दी जाती है और फिर सूप बनाया जाता है।

मीलवॉर्म से प्रोटीन बार, कुकीज और सलाद बन रहा

झींगुरों की आबादी बढ़ाने के लिए उन्हें कसाबा खिलाया जाता है। कसाबा के पेड़ से साबूदाना भी बनता है। झींगुरों को भूनने के बाद पीसकर आटा बनाया जाता है। इससे चिप्स, ब्रेड और पास्ता बनाया जाता है। बर्गर, फ्राइज और बिस्किट के अलावा मिल्क शेक में भी झींगुर के पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है।

मीलवॉर्म का लार्वा कई तरह से खाने में इस्तेमाल होता है। इसको भूनकर, तलकर और फिर पीसकर आटा बनाया जाता है और फिर प्रोटीन बार तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा कुकीज, एनर्जी बार और सलाद में भी मीलवॉर्म का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

टिडि्डयों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भूनकर, तलकर और पाउडर बनाकर प्रयोग में लाते हैं। इनका आटा बनाकर भी कई तरह से इस्तेमाल करते हैं।

पशुओं की हडि्डयों से बनाया जा रहा शोरबा

  1. खरगोश और बारहसिंगा जैसे जानवरों की हड्डियों का इस्तेमाल शोरबा बनाने के लिए किया जा रहा है। आमतौर पर इस तरह का शोरबा सूप, स्टू या प्रोटीनयुक्त ड्रिंक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  2. कीट-पतंगों से बने फूड प्रोडक्ट ईको-फ्रेंडली हैं, लेकिन इनका चलन कम होने की वजह से ये अभी महंगे हैं।
  3. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनिया में 8 अरब आबादी का पेट कृषि उत्पादों से भरने के लिए अनाज, दाल, तिलहन का उत्पादन 70% बढ़ाना होगा।
  4. झींगुर से एक किलो प्रोटीन पाउडर बनाने में केवल 12 लीटर पानी लगता है जबकि जानवरों के दूध से इतना प्रोटीन पाउडर बनाने में हजारों लीटर पानी खर्च होता है।
  5. झींगुर का 1 किलो आटा करीब 5500 रुपए किलो आता है। इसके एक पास्ता का पैकेट लगभग 725 रुपए का आता है। यह आम पास्ता से आठ गुना महंगा है।
  6. अभी कीट-पतंगों से फूड प्रोडक्ट बनने का चलन कम है। इसकी तकनीक और मार्केटिंग न होने की वजह से ये महंगे हैं। यूरोपियन यूनियन के इन्हें ह्यूमन फूड मानने के बाद ये सस्ते हो जाएंगे।
  7. अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई देशों में झींगुर, टिड्डे और मीलवॉर्म की खेती की जाती है और प्रोसेस कर आटे में तब्दील किया जाता है। फिर कई तरह की डिश तैयार की जाती हैं।

थाइलैंड में कीड़ों की डिश खाना आम बात

थाइलैंड के लोग झींगुर, रेशमकीट, बीटल की कई प्रजातियों की डिश को बड़े चाव से खाते हैं। आमतौर पर यहां इन्हें डीप फ्राई कर रख दिया जाता है और बाद में दूसरे व्यंजनों में उपयोग किया जाता है।

मसाले के साथ टिडि्डयों को खाते हैं मेक्सिको के लोग

मेक्सिको के कुछ इलाकों में टिडि्डयों को बेहद पसंद किया जाता है। यहां के लोगों में टिडि्डयों के स्नैक्स की बेहद मांग है। इन्हें भूनकर मिर्च, नींबू, नमक और मसाला डालकर खाया जाता है।

सदियों से विचट्‌टी ग्रब्स खाते आ रहे हैं ऑस्ट्रेलियाई

ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों में स्थानीय कीड़ा विचट्‌टी ग्रब्स खाने का लंबा इतिहास है। इस कीड़े के लार्वा को कच्चा या थोड़ा बहुत पकाकर खाया जाता है।

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